Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 10

83 Mantra
11/10
Devata- सविता देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- भुरिगनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अभ्रि॑रसि॒ नार्य॑सि॒ त्वया॑ व॒यम॒ग्निꣳ श॑केम॒ खनि॑तुꣳ स॒धस्थ॒ आ। जाग॑तेन॒ छन्द॑साङ्गिर॒स्वत्॥१०॥

अभ्रिः॑। अ॒सि॒। नारी॑। अ॒सि॒। त्वया॑। व॒यम्। अ॒ग्निम्। श॒के॒म॒। खनि॑तुम्। स॒धस्थ॒ इति॑ स॒धस्थे॑। आ। जाग॑तेन। छन्द॑सा। अ॒ङ्गि॒र॒स्वत् ॥१० ॥

Mantra without Swara
अभ्रिरसि नार्यसि त्वया वयमग्निँ शकेम खनितुँ सधस्थ आ जागतेन छन्दसाङ्गिरस्वत् ॥

अभ्रिः। असि। नारी। असि। त्वया। वयम्। अग्निम्। शकेम। खनितुम्। सधस्थ इति सधस्थे। आ। जागतेन। छन्दसा। अङ्गिरस्वत्॥१०॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे शिल्पी! (त्वया) जिस साधन से युक्त (सधस्थे) एक स्थान पर विद्यमान (वयम्) हम लोग जो (अभ्रिः) लोहे का बना हुआ भूमि खोदने का साधन है, जो (नारी) नर के लिये नारी के तुल्य साध्य को सिद्ध करने वाला (असि) है, जिसे ग्रहण करके (जागतेन छन्दसा) जगती छन्द से प्रतिपादित साधन से (अङ्गिरस्वत्) प्राणों के तुल्य बलवान् (अग्निम्) विद्युत् आदि, अग्नि को (खनितुम्) खोद [आ+शकेम) सकें, उस अभ्रि को तू बना ॥११ । १० ॥
Essence
मनुष्य अभ्रि आदि उत्तम साधनों से पृथिवी को खोद कर अग्नि से संयुक्त करके सुवर्ण आदि का निर्माण करें, किन्तु पहले भूगर्भ-सम्बन्धी पदार्थ विद्या को प्राप्त कर के ऐसा कर सकते हैं, ऐसा निश्चित जानना चाहिये ॥
Subject
मनुष्य भूमि आदि से सुवर्ण आदि पदार्थों को कैसे प्राप्त करें, यह उपदेश किया है॥
Commentary Essence
भूमि आदि से सुवर्ण आदि कैसे प्राप्त करें--मनुष्य शिल्पी से एक अभ्रि (लोहमय भूमि खोदने का साधन=कस्सी) बनवावें। जैसे नर के लिये नारी साध्य की साधिका है, वैसे अभ्रि भी भूमि खोदने का उत्तम साधन है। शिल्पी जनों के साथ रह कर अभ्रि आदि उत्तम साधनों से भूमि को खोदकर द्रव्यों को निकालें और उन्हें अग्नि से संयुक्त करके उनसे सुवर्ण आदि का निर्माण करें। लोहमय साधन ऐसे हों जो अग्नि का खनन कर सकें, अग्नि में काम दे सकें। भूमि आदि से सुवर्ण आदि को प्राप्त करने के लिये भूगर्भविद्या को भी अवश्य सीखें। भूगर्भविद्या के विना ऐसा करना सम्भव नहीं ॥११ । १० ॥