Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 10 / Mantra 26

34 Mantra
10/26
Devata- वरुणो देवता Rishi- शुनःशेप ऋषिः Chhand- भूरिक अनुष्टुप्, Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
स्यो॒नासि॑ सु॒षदा॑सि क्ष॒त्रस्य॒ योनि॑रसि। स्यो॒नामासी॑द सु॒षदा॒मासी॑द क्ष॒त्रस्य॒ योनि॒मासी॑द॥२६॥

स्यो॒ना। अ॒सि॒। सु॒षदा॑। सु॒सदेति॑ सु॒ऽसदा॑। अ॒सि॒। क्ष॒त्रस्य॑। योनिः॑। अ॒सि॒। स्यो॒नाम्। आ। सी॒द॒। सु॒षदा॑म्। सु॒सदा॒मिति॑ सु॒ऽसदा॑म्। आ। सी॒द॒। क्ष॒त्रस्य॑। योनि॑म्। आ। सी॒द॒ ॥२६॥

Mantra without Swara
स्योनासि सुषदासि क्षत्रस्य योनिरसि स्योनामासीद सुषदामासीद क्षत्रस्य योनिमासीद ॥

स्योना। असि। सुषदा। सुसदेति सुऽसदा। असि। क्षत्रस्य। योनिः। असि। स्योनाम्। आ। सीद। सुषदाम्। सुसदामिति सुऽसदाम्। आ। सीद। क्षत्रस्य। योनिम्। आ। सीद॥२६॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे रानी! तू (स्योना) सुखरूप (असि) है, (सुषदा) उत्तम व्यवहार में विद्यमान (असि) है, [क्षत्रस्य] राजसम्बन्धी [योनिः] घर में न्याय करने वाली [असि] है। सो [त्वम्] तू [स्योनाम्] सुखकारक [सुषदाम्] उत्तम सुख देने वाली (क्षत्रस्य) क्षत्रिय कुल की (योनिम्) राजनीति को (आसीद) प्राप्त हो ।। १० । २६ ।।
Essence
राजपत्नी सब स्त्रियों का न्याय और शिक्षा सदा करें, इनका न्याय और शिक्षा पुरुष न करें। क्योंकि पुरुषों के समीप स्त्रियाँ लज्जित और भयभीत होकर यथावत् न बोल सकती हैं और न पढ़ सकती हैं ।। १० । २६ ।।
Subject
स्त्रियों का न्याय, विद्या और सुशिक्षा स्त्रियाँ ही करें, और पुरुषों का पुरुष करें, इस विषय का उपदेश किया है ।।
Refrences
इस मन्त्र की व्याख्या शत० (५ । ४ । ४ । २-४) में की गई है ।। १० । २६ ।।
Commentary Essence
स्त्रियों का न्यायादि स्त्रियाँ ही करें--राजपत्नी सब स्त्रियों को सुख देने वाली, उत्तम व्यवहार करने वाली हो। स्त्रियों का न्याय राजपत्नी किया करे। वह न्याय से सब सुखों को उत्पन्न करने वाली और उत्तम सुखों को देने वाली हो। क्षत्रिय कुल की राजनीति की ज्ञात्री हो। स्त्रियों का न्याय, विद्या और सुशिक्षा स्त्रियाँ ही करें पुरुष न करें, क्योंकि पुरुषों के पास स्त्रियाँ लज्जित और भयभीत-सी होकर यथावत् नहीं बोल सकतीं और न पढ़ सकती हैं ।। १० । २६ ।।