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Yajurveda Adhyay 36 / Mantra 7

24 Mantra
36/7
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- दध्यङ्ङाथर्वण ऋषिः Chhand- वर्द्धमाना गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
कया॒ त्वं न॑ऽ ऊ॒त्याभि प्र म॑न्दसे वृषन्।कया॑ स्तो॒तृभ्य॒ऽ आ भ॑र॥७॥

कया॑। त्वम्। नः॒। ऊ॒त्या। अ॒भि। प्र। म॒न्द॒से॒। वृ॒ष॒न् ॥ कया॑। स्तो॒तृभ्य॒ इति॑ स्तो॒तृऽभ्यः॑। आ। भ॒र॒ ॥७ ॥

Mantra without Swara
कया त्वम्नऽऊत्याभि प्र मन्दसे वृषन् । कया स्तोतृभ्य आ भर ॥

कया। त्वम्। नः। ऊत्या। अभि। प्र। मन्दसे। वृषन्॥ कया। स्तोतृभ्य इति स्तोतृऽभ्यः। आ। भर॥७॥

Meaning
हे (वृषन्) सब ओर से सुखों को वर्षानेवाले ईश्वर (त्वम्) आप (कया) किस (ऊत्या) रक्षण आदि क्रिया से (नः) हमको (अभि, प्र, मन्दसे) सब ओर से आनन्दित करते और (कया) किस रीति से (स्तोतृभ्यः) आपकी प्रशंसा करनेवाले मनुष्यों के लिये सुख को (आ, भर) अच्छे प्रकार धारण कीजिये॥७॥
Essence
हे भगवन् परमात्मन्! जिस युक्ति से आप धर्मात्माओं को आनन्दित करते, उनकी सब ओर से रक्षा करते हैं, उस युक्ति को हमको जताइये॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥

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