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Yajurveda Adhyay 36 / Mantra 16

24 Mantra
36/16
Devata- आपो देवताः Rishi- सिन्धुद्वीप ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तस्मा॒ऽ अरं॑ गमाम वो॒ यस्य॒ क्षया॑य॒ जिन्व॑थ।आपो॑ ज॒नय॑था च नः॥१६॥

तस्मै॑। अर॑म्। ग॒मा॒म॒। वः॒। यस्य॑। क्षया॑य। जिन्व॑थ ॥ आपः॑। ज॒नय॑थ। च॒। नः॒ ॥१६ ॥

Mantra without Swara
तस्माऽअरङ्गमाम वो यस्य क्षयाय जिन्वथ । आपो जनयथा च नः ॥

तस्मै। अरम्। गमाम। वः। यस्य। क्षयाय। जिन्वथ॥ आपः। जनयथ। च। नः॥१६॥

Meaning
हे स्त्रियो! जैसे तुम लोग (नः) हमको (आपः) जलों के तुल्य शान्त (जनयथ) प्रकट करो, वैसे (वः) तुमको हम लोग शान्त प्रकट करें (च) और तुम लोग (यस्य) जिस पति के (क्षयाय) निवास के लिये (जिन्वथ) उसको तृप्त करो (तस्मै) उस के लिये हम लोग (अरम्) पूर्ण सामर्थ्ययुक्त (गमाम) प्राप्त होवें॥१६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। स्त्री-पुरुषों को योग्य है कि परस्पर आनन्द के लिये जल के तुल्य सरलता से वर्तें और शुभ आचरणों के साथ परस्पर सुशोभित ही रहें॥१६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥

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