Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Yajurveda Adhyay 25 / Mantra 9

48 Mantra
25/9
Devata- पूषादयो देवताः Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- भुरिगत्यष्टिः Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
विधृ॑तिं॒ नाभ्या॑ घृ॒तꣳरसे॑ना॒पो यू॒ष्णा मरी॑चीर्वि॒प्रुड्भि॑र्नीहा॒रमू॒ष्मणा॑ शी॒नं वस॑या॒ प्रुष्वा॒ऽ अश्रु॑भिर्ह्रा॒दुनी॑र्दू॒षीका॑भिर॒स्ना रक्षा॑सि चि॒त्राण्यङ्गै॒र्नक्ष॑त्राणि रू॒पेण॑ पृथि॒वीं त्व॒चा जु॑म्ब॒काय॒ स्वाहा॑॥९॥

विधृ॑ति॒मिति॒ विऽधृ॑तिम्। नाभ्या॑। घृ॒तम्। रसे॑न। अ॒पः। यू॒ष्णा। मरी॑चीः। वि॒प्रुड्भि॒रिति॑ वि॒प्रुट्ऽभिः॑। नी॒हा॒रम्। ऊ॒ष्मणा॑। शी॒नम्। वस॑या। प्रुष्वाः॑। अश्रु॑भि॒रित्यश्रु॑ऽभिः। ह्ना॒दु॒नीः॑। दू॒षीका॑भिः। अ॒स्ना। रक्षा॑ꣳसि। चि॒त्राणि॑। अङ्गैः॑। नक्ष॑त्राणि। रू॒पेण॑। पृ॒थि॒वीम्। त्व॒चा। जु॒म्ब॒काय॑। स्वाहा॑ ॥९ ॥

Mantra without Swara
विधृतिन्नाभ्या धृतँ रसेनापो यूष्णा मरीचीर्विप्रुड्भिर्नीहारमूष्मणा शीनँवसया प्रुष्वाऽअश्रुभिह््र्रादुनीर्दूषीकाभिरस्ना रक्षाँसि चित्राण्यङ्गैर्नक्षत्राणि रूपेण पृथिवीन्त्वचा जुम्बकाय स्वाहा ॥

विधृतिमिति विऽधृतिम्। नाभ्या। घृतम्। रसेन। अपः। यूष्णा। मरीचीः। विप्रुड्भिरिति विप्रुट्ऽभिः। नीहारम्। ऊष्मणा। शीनम्। वसया। प्रुष्वाः। अश्रुभिरित्यश्रुऽभिः। ह्नादुनीः। दूषीकाभिः। अस्ना। रक्षाꣳसि। चित्राणि। अङ्गैः। नक्षत्राणि। रूपेण। पृथिवीम्। त्वचा। जुम्बकाय। स्वाहा॥९॥

Meaning
हे मनुष्यो! तुम लोग (नाभ्या) नाभि से (विधृतिम्) विशेष करके धारण को (घृतम्) घी को (रसेन) रस से (अपः) जलों को (यूष्णा) क्वाथ किये रस से (मरीचीः) किरणों को (विप्रुड्भिः) विशेषकर पूरण पदार्थों से (नीहारम्) कुहर को (ऊष्मणा) गरमी से (शीनम्) जमे हुए घी को (वसया) निवासहेतु जीवन से (प्रुष्वाः) जिनसे सींचते हैं, उन क्रियाओं को (अश्रुभिः) आंसुओं से (ह्रादुनीः) शब्दों की अप्रकट उच्चारण-क्रियाओं को (दूषीकाभिः) विकाररूप क्रियाओं से (चित्राणि) चित्र-विचित्र (रक्षांसि) पालना करने योग्य (अस्ना) रुधिरादि पदार्थों को (अङ्गैः) अङ्गों और (रूपेण) रूप से (नक्षत्राणि) तारागणों को और (त्वचा) मांस रुधिर आदि को ढांपने वाली खाल आदि से (पृथिवीम्) पृथिवी को जानकर (जुम्बकाय) अतिवेगवान् के लिये (स्वाहा) सत्य वाणी का प्रयोग अर्थात् उच्चारण करो॥९॥
Essence
मनुष्यों को धारणा आदि क्रियाओं से खोटे आचरण और रोगों की निवृत्ति और सत्यभाषण आदि धर्म के लक्षणों का विचार कर प्रवृत्त करना चाहिये॥९॥
Subject
फिर किससे क्या होता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.