Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Yajurveda Adhyay 25 / Mantra 17

48 Mantra
25/17
Devata- वायुर्देवता Rishi- गोतम ऋषिः Chhand- भुरिक् त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
तन्नो॒ वातो॑ मयो॒भु वा॑तु भेष॒जं तन्मा॒ता पृ॑थि॒वी तत्पि॒ता द्यौः।तद्ग्रावा॑णः सोम॒सुतो॑ मयो॒भुव॒स्तद॑श्विना शृणुतं धिष्ण्या यु॒वम्॥१७॥

तत्। नः॒। वातः॑। म॒यो॒भ्विति॑। मयः॒ऽभु। वा॒तु॒। भे॒ष॒जम्। तत्। मा॒ता। पृ॒थि॒वी। तत्। पि॒ता। द्यौः। तत्। ग्रावा॑णः। सो॒म॒सुत॒ इति॑ सोम॒ऽसुतः॑। म॒यो॒भुव॒ इति॑ मयः॒ऽभुवः॑। तत्। अ॒श्वि॒ना॒। शृ॒णु॒त॒म्। धि॒ष्ण्या॒। यु॒वम् ॥१७ ॥

Mantra without Swara
तन्नो वातो मयोभु वातु भेषजञ्तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः । तद्ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतन्धिष्ण्या युवम् ॥

तत्। नः। वातः। मयोभ्विति। मयःऽभु। वातु। भेषजम्। तत्। माता। पृथिवी। तत्। पिता। द्यौः। तत्। ग्रावाणः। सोमसुत इति सोमऽसुतः। मयोभुव इति मयःऽभुवः। तत्। अश्विना। शृणुतम्। धिष्ण्या। युवम्॥१७॥

Meaning
हे (अश्विना) पढ़ाने और पढ़ने हारे सज्जनो! (धिष्ण्या) भूमि के समान धारण करने वाले (युवम्) तुम दोनों हम लोगों ने जो पढ़ा है, उस को (शृणुतम्) सुनो। जैसे (नः) हम लोगों के लिये (वातः) पवन (तत्) उस (मयोभु) सुख करने हारी (भेषजम्) ओषधि की (वातु) प्राप्ति करे (तत्) उस ओषधि को (माता) मान्य देने वाली (पृथिवी) विस्तारयुक्त भूमि तथा (तत्) उस को (पिता) पालना का हेतु (द्यौः) सूर्यमण्डल प्राप्त करे तथा (तत्) उस को (सोमसुतः) ओषधि और ऐश्वर्य को उत्पन्न करने और (मयोभुवः) सुख की भावना कराने हारे (ग्रावाणः) मेघ प्राप्त करें (तत्) यह सब व्यवहार तुम्हारे लिये भी होवे॥१७॥
Essence
जिसकी पृथिवी के समान माता और सूर्य के समान पिता हो, वह सब ओर से कुशली सुखी होकर सब को नीरोग और चतुर करे॥१७॥
Subject
फिर कौन क्या करे, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.