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Yajurveda - Mantra 9

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 9

95 Mantra
19/9
Devata- सोमो देवता Rishi- आभूतिर्ऋषिः Chhand- निचृच्छक्वरी Swara- धैवतः
Mantra with Swara
तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि वी॒र्यमसि वी॒र्यं मयि॑ धेहि॒ बल॑मसि॒ बलं॒ मयि॑ धे॒ह्योजो॒ऽस्योजो॒ मयि॑ धेहि म॒न्युर॑सि म॒न्युं मयि॑ धेहि॒ सहो॑ऽसि॒ सहो॒ मयि॑ धेहि॥९॥

तेजः॑। अ॒सि॒। तेजः॑। मयि॑। धे॒हि॒। वी॒र्य᳖म्। अ॒सि॒। वी॒र्य᳖म्। मयि॑। धे॒हि॒। बल॑म्। अ॒सि॒। बल॑म्। मयि॑। धे॒हि॒। ओजः॑। अ॒सि॒। ओजः॑। मयि॑। धे॒हि॒। म॒न्युः। अ॒सि॒। म॒न्युम्। मयि॑। धे॒हि॒। सहः॑। अ॒सि॒। सहः॑। मयि॑। धे॒हि॒ ॥९ ॥

Mantra without Swara
तेजोसि तेजो मयि धेहि । वीर्यमसि वीर्यम्मयि धेहि बलमसि बलम्मयि धेह्योजोस्योजो मयि धेहि मन्युरसि मन्युम्मयि धेहि सहोसि सहो मयि धेहि ॥

तेजः। असि। तेजः। मयि। धेहि। वीर्यम्। असि। वीर्यम्। मयि। धेहि। बलम्। असि। बलम्। मयि। धेहि। ओजः। असि। ओजः। मयि। धेहि। मन्युः। असि। मन्युम्। मयि। धेहि। सहः। असि। सहः। मयि। धेहि॥९॥

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Meaning
हे सकल शुभगुणकर राजन्! जो तेरे में (तेजः) तेज (असि) हैं, उस (तेजः) तेज को (मयि) मेरे में (धेहि) धारण कीजिये। जो तेरे में (वीर्यम्) पराक्रम (असि) है, उस (वीर्यम्) पराक्रम को (मयि) मुझ में (धेहि) धरिये। जो तेरे में (बलम्) बल (असि) है, उस (बलम्) बल को (मयि) मुझ में भी (धेहि) धरिये। जो तेरे में (ओजः) प्राण का सामर्थ्य (असि) है, उस (ओजः) सामर्थ्य को (मयि) मुझ में (धेहि) धरिये। जो तुझ में (मन्युः) दुष्टों पर क्रोध (असि) है, उस (मन्युम्) क्रोध को (मयि) मुझ में (धेहि) धरिये। जो तुझ में (सहः) सहनशीलता (असि) है, उस (सहः) सहनशीलता को (मयि) मुझ में भी (धेहि) धारण कीजिये॥९॥
Essence
सब मनुष्यों के प्रति ईश्वर की यह आज्ञा है कि जिन शुभ गुण-कर्म-स्वभावों को विद्वान् लोग धारण करें, उनको औरों में भी धारण करावें और जैसे दुष्टाचारी मनुष्यों पर क्रोध करें, वैसे धार्मिक मनुष्यों में प्रीति भी निरन्तर किया करें॥९॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥