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Yajurveda - Mantra 21

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 21

95 Mantra
19/21
Devata- सोमो देवता Rishi- हैमवर्चिर्ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
धा॒नाः क॑र॒म्भः सक्त॑वः परीवा॒पः पयो॒ दधि॑। सोम॑स्य रू॒पꣳ ह॒विष॑ऽआ॒मिक्षा॒ वजि॑नं॒ मधु॑॥२१॥

धा॒नाः। क॒र॒म्भः। सक्त॑वः। प॒री॒वा॒प इति॑ परि॑ऽवा॒पः। पयः॑। दधि॑। सोम॑स्य। रू॒पम्। ह॒विषः॑। आ॒मिक्षा॑। वाजि॑नम्। मधु॑ ॥२१ ॥

Mantra without Swara
धानाः करम्भः सक्तवः परीवापः पयो दधि । सोमस्य रूपँ हविष आमिक्षा वाजिनम्मधु ॥

धानाः। करम्भः। सक्तवः। परीवाप इति परिऽवापः। पयः। दधि। सोमस्य। रूपम्। हविषः। आमिक्षा। वाजिनम्। मधु॥२१॥

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Meaning
हे मनुष्यो! तुम लोग (हविषः) होम करने योग्य (सोमस्य) यन्त्र द्वारा खींचने योग्य ओषधिरूप रस के (रूपम्) रूप को (धानाः) भुने हुए अन्न (करम्भः) मथन का साधन (सक्तवः) सत्तू (परीवापः) सब ओर से बीज का बोना (पयः) दूध (दधि) दही (आमिक्षा) दही, दूध, मीठे का मिलाया हुआ (वाजिनम्) प्रशस्त अन्नों को सम्बन्धी सार वस्तु और (मधु) सहत के गुण को जानो॥२१॥
Essence
जो पदार्थ पुष्टिकारक, सुगन्धयुक्त, मधुर और रोगनाशक गुणयुक्त हैं, वे होम करने के योग्य हविः संज्ञक हैं॥२१॥
Subject
कौन पदार्थ होम के योग्य हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥