Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 88

117 Mantra
12/88
Devata- वैद्या देवताः Rishi- भिषगृषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ॒न्या वो॑ऽअ॒न्याम॑वत्व॒न्यान्यस्या॒ऽउपा॑वत। ताः सर्वाः॑ संविदा॒नाऽइ॒दं मे॒ प्राव॑ता॒ वचः॑॥८८॥

अ॒न्या। वः॒। अ॒न्याम्। अ॒व॒तु॒। अ॒न्या। अ॒न्यस्याः॑। उप॑। अ॒व॒त॒। ताः। सर्वाः॑। सं॒वि॒दा॒ना इति॑ सम्ऽवि॒दा॒नाः। इ॒दम्। मे॒। प्र। अ॒व॒त॒। वचः॑ ॥८८ ॥

Mantra without Swara
अन्या वोऽअन्यामवत्वन्यान्यस्याऽउपावत । ताः सर्वाः सँविदाना इदम्मे प्रावता वचः ॥

अन्या। वः। अन्याम्। अवतु। अन्या। अन्यस्याः। उप। अवत। ताः। सर्वाः। संविदाना इति सम्ऽविदानाः। इदम्। मे। प्र। अवत। वचः॥८८॥

Meaning
हे स्त्रियो! (संविदानाः) आपस में संवाद करती हुई तुम लोग (मे) मेरे (इदम्) इस (वचः) वचन को (प्रावत) पालन करो, (ताः) उन (सर्वाः) सब ओषधियों की (अन्या) दूसरी (अन्यस्याः) दूसरी की रक्षा के समान (उपावत) समीप से रक्षा करो। जैसे (अन्या) एक (अन्याम्) दूसरी की रक्षा करती है, वैसे (वः) तुम लोगों को पढ़ाने हारी स्त्री (अवतु) तुम्हारी रक्षा करे॥८८॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे श्रेष्ठ नियम वाली स्त्री एक-दूसरे की रक्षा करती हैं, वैसे ही अनुकूलता से मिलाई हुई ओषधी सब रोगों से रक्षा करती हैं। हे स्त्रियो! तुम लोग ओषधिविद्या के लिये परस्पर संवाद करो॥८८॥
Subject
युक्ति से मिलाई हुई ओषधियां रोगों को नष्ट करती हैं, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.