1-Balkand / Sarga 21
Shloka 6
Shloka
इक्ष्वाकूणां कुले जातः साक्षाद् धर्म इवापरः ।धृतिमान् सुव्रतः श्रीमान् न धर्मं हातुमर्हसि ॥१-२१-६॥
Sarga 21 / Shloka 6 Balkand