Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 98

1874 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣡ होत्रे꣢꣯ पू꣣र्व्यं꣢꣫ वचो꣣ऽग्न꣡ये꣢ भरता बृ꣣ह꣢त् । वि꣣पां꣡ ज्योती꣢꣯ꣳषि꣣ बि꣡भ्र꣢ते꣣ न꣢ वे꣣ध꣡से꣢ ॥९८॥

प्र꣢ । हो꣡त्रे꣢꣯ । पू꣣र्व्य꣢म् । व꣡चः꣢꣯ । अ꣣ग्न꣡ये꣢ । भ꣣रत । बृह꣢त् । वि꣣पा꣢म् । ज्यो꣡तीँ꣢꣯षि꣣ । बि꣡भ्र꣢꣯ते । न । वे꣣ध꣡से꣢ ॥९८॥

Mantra without Swara
प्र होत्रे पूर्व्यं वचोऽग्नये भरता बृहत् । विपां ज्योतीꣳषि बिभ्रते न वेधसे ॥

प्र । होत्रे । पूर्व्यम् । वचः । अग्नये । भरत । बृहत् । विपाम् । ज्योतीँषि । बिभ्रते । न । वेधसे ॥९८॥

Samveda - Mantra Number : 98
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 11;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = हे मनुष्यो ! ( होत्राय ) = होता, समस्त संसार को अपने महान् जठरानल में प्रलय काल के अवसर पर आहुति करलेने वाले, ( विपां ) = विद्वानों के ( ज्योतींषि ) = ज्ञान और ब्रह्मचर्यादि तपोयुक्त  गुणों और सूर्य, अग्नि, विद्युद् आदि प्रकाशों को ( बिभ्रते ) = धारण करनेहार ( वेधसे न१   ) = सब के विधाता के समान सब के उत्पादक ( अग्नये ) = उस ईश्वररूप अग्नि के लिये ( बृहत् वचः ) = विशाल, ज्ञानसम्पन्न व्यक्त वाणी, वेद को ( भरत ) = प्राप्त करो, उसका उपदेश कर औरों तक पहुंचाओ , अध्ययन करो, कराओ । 
Subject
परमेश्वर की स्तुति
Footnote
१. वेधा जगद्विधाता परमेश्वरः आदित्यादीनि ज्योतींषि करोति इति सा० । 
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषिः - विश्वामित्र: ।

छन्दः - उष्णिक् ।