Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 756

1874 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣य꣡ꣳ सूर्य꣢꣯ इवोप꣣दृ꣢ग꣣य꣡ꣳ सरा꣢꣯ꣳसि धावति । स꣣प्त꣢ प्र꣣व꣢त꣣ आ꣡ दिव꣢꣯म् ॥७५६॥

अ꣣य꣢म् । सू꣡र्यः꣢꣯ । इ꣣व । उपदृ꣢क् । उ꣣प । दृ꣢क् । अ꣣य꣢म् । स꣡रा꣢꣯ꣳसि । धा꣣वति । स꣣प्त꣢ । प्र꣣व꣡तः꣢ । आ । दि꣡व꣢꣯म् ॥७५६॥

Mantra without Swara
अयꣳ सूर्य इवोपदृगयꣳ सराꣳसि धावति । सप्त प्रवत आ दिवम् ॥

अयम् । सूर्यः । इव । उपदृक् । उप । दृक् । अयम् । सराꣳसि । धावति । सप्त । प्रवतः । आ । दिवम् ॥७५६॥

Samveda - Mantra Number : 756
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = ( २ ) ( अयं ) = यह सोम ( सूर्य इव ) = सूर्य के समान ( उपदृग् ) = समस्त पदार्थों और सब प्राणियों, सब लोकों का द्रष्टा है ( अयं ) = यह सोम ( सरांसि ) = समस्त लोकों में ( धावति ) = व्यापता प्रकाशित करता और गति देता है, ( दिवम् ) = आकाश के ( सप्त ) = सात प्रकार के ( प्रवतः ) = गतिमान् पदार्थों को चलाता है । अध्यात्मपक्ष में - जीव, प्राणात्मा ( सरांसि ) = इन्द्रियों में स्वयं गति करता है और द्यौः अर्थात् मूर्धास्थान में ( सप्त प्रवतः ) = सात शीर्षण्य प्राणों को भी गति देता है ।
Subject
"Missing"
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषिः - अवत्सार:।
देवता -अग्नि:।
छन्द: - गायत्री।
स्वरः - षड्ज:।