Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 605

1874 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
अ꣣ग्नि꣡मी꣢डे पु꣣रो꣡हि꣢तं य꣣ज्ञ꣡स्य꣢ दे꣣व꣢मृ꣣त्वि꣡ज꣢म् । हो꣡ता꣢रꣳ र꣣त्नधा꣡त꣢मम् ॥६०५॥

अ꣣ग्नि꣢म् । ई꣣डे । पुरो꣡हि꣢तम् । पु꣣रः꣢ । हि꣣तम् । यज्ञ꣡स्य꣢ । दे꣣व꣢म् । ऋ꣣त्वि꣡ज꣢म् । हो꣡ता꣢꣯रम् । रत्नधा꣡त꣢मम् । र꣣त्न । धा꣡त꣢꣯मम् ॥६०५॥

Mantra without Swara
अग्निमीडे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारꣳ रत्नधातमम् ॥

अग्निम् । ईडे । पुरोहितम् । पुरः । हितम् । यज्ञस्य । देवम् । ऋत्विजम् । होतारम् । रत्नधातमम् । रत्न । धातमम् ॥६०५॥

Samveda - Mantra Number : 605
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 3;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा०  = ( यज्ञस्य देवम् ) = समस्त यज्ञों, उपासनाओं के उपास्य देव ( पुरोहितम् ) = प्रकाशमान, ज्ञानवान् पूज्य, साक्षी रूप से अन्धकार में दीपक के समान ज्ञान प्रकाश प्राप्त करने के लिये आगे मुख्य स्थान पर स्थापित ( ऋत्विजम् ) = ऋतुओं आदित्यों और प्राणों द्वारा पूजनीय, ( होतारं ) = सबको धारण करने और सब सुखों को प्रदान करनेहारे, सबके प्रतिपालक ( रत्नधातमम् ) = समस्त रमणीय पदार्थों को धारण करने वाले, ( अग्निम् ) = ज्ञानस्वरूप सबके अग्रणी, प्रकाशक परमात्मा की ( ईडे ) = स्तुति करता हूं। 
Subject
"Missing"
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
 

ऋषिः - मधुछन्दा:। 

 देवता - अग्नि:। 

छन्दः - गायत्री।

स्वरः - षड्जः