Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 453

1874 Mantra
Devata- विश्वेदेवाः Rishi- कवष ऐलूषः Chhand- द्विपदा गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
वि꣢ स्रु꣣त꣢यो꣣ य꣡था꣢ प꣣थ꣢꣫ इन्द्र꣣ त्व꣡द्य꣢न्तु रा꣣त꣡यः꣢ ॥४५३॥

वि꣢ । स्रु꣣त꣡यः꣢ । य꣡था꣢꣯ । प꣣थः꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯ । त्वत् । य꣣न्तु । रात꣡यः꣢ ॥४५३॥

Mantra without Swara
वि स्रुतयो यथा पथ इन्द्र त्वद्यन्तु रातयः ॥

वि । स्रुतयः । यथा । पथः । इन्द्र । त्वत् । यन्तु । रातयः ॥४५३॥

Samveda - Mantra Number : 453
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 11;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = ( यथा ) = जिस प्रकार ( पथा ) = मार्ग पाकर ( रातयः ) = बहने वाली जलधाराएं वह जाती हैं उसी प्रकार ( रातयः ) = नाना पदार्थों की दानराशियां, हे ( इन्द्र ) =  परमेश्वर ! ( त्वद् ) = तुझ से ( वि यन्तु ) = विविध प्रकार से निकल कर हमें प्राप्त हों । 
Subject
"Missing"
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषिः - कवष ऐलूषः।

देवता - विश्वेदेवाः।

छन्दः - द्विपदापंक्ति:।

स्वरः - पंचम:।