Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 31

1874 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
उ꣢दु꣣ त्यं꣢ जा꣣त꣡वे꣢दसं दे꣣वं꣡ व꣢हन्ति के꣣त꣡वः꣢ । दृ꣣शे꣡ विश्वा꣢꣯य꣣ सू꣡र्य꣢म् ॥३१॥

उ꣢त् । उ꣣ । त्य꣢म् । जा꣣त꣡वे꣢दसम् । जा꣣त꣢ । वे꣣दसम् । देव꣢म् । व꣣हन्ति । केत꣡वः꣢ । दृ꣣शे꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯य । सू꣡र्य꣢꣯म् ॥३१॥

Mantra without Swara
उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः । दृशे विश्वाय सूर्यम् ॥

उत् । उ । त्यम् । जातवेदसम् । जात । वेदसम् । देवम् । वहन्ति । केतवः । दृशे । विश्वाय । सूर्यम् ॥३१॥

Samveda - Mantra Number : 31
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = ( केतवः१  ) = ज्ञान करने, करानेवाले रश्मियों के समान प्रज्ञाएं या विद्वान्गण ( सूर्यम् ) = सूर्य के समान प्रकाशमान, समस्त संसार के उत्पादक उस सविता, ( जातवेदसे ) = सब पदार्थों के जाननेहारे या वेदों के मूलकारण ( त्यं उ ) = उस ( देवं ) = परमात्मा देव को ही ( उद् वहन्ति ) = धारण करते हैं कि ( विश्वाय ) = समस्त संसार उसको ( दृशे ) = देख ले, जान ले । 

सब विद्वान् उसे ज्ञान का मूलकारण और सब प्राणियों का प्रेरक सबसे ऊपर बतलाते हैं कि सब उसको जानलें और उसके दिये ज्ञान से स्वयं भी सब कार्य व्यवहारों को जानें ।
Subject
परमेश्वर की स्तुति
Footnote
१. केतुरिति प्रज्ञानाम | नि०३ | ९  ॥
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषि: - कण्व :। 
छन्दः - गायत्री।