Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 176

1874 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- गोधा ऋषिका Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
न꣡कि꣢ देवा इनीमसि꣣ न꣡ क्या यो꣢꣯पयामसि । म꣣न्त्र꣡श्रु꣢त्यं चरामसि ॥१७६॥

न꣢ । कि꣣ । देवाः । इनीमसि । न꣢ । कि꣣ । आ꣢ । यो꣣पयामसि । मन्त्रश्रु꣡त्य꣢म् । म꣣न्त्र । श्रु꣡त्य꣢꣯म् । च꣣रामसि ॥१७६॥

Mantra without Swara
नकि देवा इनीमसि न क्या योपयामसि । मन्त्रश्रुत्यं चरामसि ॥

न । कि । देवाः । इनीमसि । न । कि । आ । योपयामसि । मन्त्रश्रुत्यम् । मन्त्र । श्रुत्यम् । चरामसि ॥१७६॥

Samveda - Mantra Number : 176
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 7;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = हे इन्द्र ! ( देवा: ) = हम इन्द्रियगण ( नकि इनीमसि ) = कुछ भी बधादि नहीं करते, ( नकिआयोपयामसि ) = और न कुछ भूल करते हैं। ( मन्त्रश्रुत्यं ) = मनन संकल्प द्वारा जो कुछ हम सुन सकते हैं तदनुसार हम ( चरामसि ) = आचरण करते हैं। प्रजा लोकों के पक्ष में- हम मंत्र और श्रुति वेद के अनुसार चले। हम दोष न करें । 
Subject
"Missing"
Footnote
१७६–‘नकिर्देवा' 'मिनीमसि' इति च ऋ० । 'पजोभिरपिकक्षेभिरत्राभि संरभामहे इति अधिकः पाठः, ऋ० । 
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
 

ऋषिः - गोधा ।

देवता - इन्द्रः।

छन्दः - गायत्री।

स्वरः - षड्जः।