Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 169

1874 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
क꣡या꣢ नश्चि꣣त्र꣡ आ भु꣢꣯वदू꣣ती꣢ स꣣दा꣡वृ꣢धः꣣ स꣡खा꣢ । क꣢या꣣ श꣡चि꣢ष्ठया वृ꣣ता꣢ ॥१६९॥

क꣡या꣢꣯ । नः꣣ । चित्रः꣢ । आ । भु꣣वत् । ऊती꣢ । स꣣दा꣡वृ꣢धः । स꣣दा꣢ । वृ꣣धः । स꣣खा꣢꣯ । स । खा꣣ । क꣡या꣢꣯ । श꣡चि꣢꣯ष्ठया । वृ꣣ता꣢ ॥१६९॥

Mantra without Swara
कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा । कया शचिष्ठया वृता ॥

कया । नः । चित्रः । आ । भुवत् । ऊती । सदावृधः । सदा । वृधः । सखा । स । खा । कया । शचिष्ठया । वृता ॥१६९॥

Samveda - Mantra Number : 169
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 6;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = ( सदावृधः ) = सत्य के बल से अधिक बढ़ने वाला इन्द्र ( चित्र: ) = ज्ञान करने योग्य, पूज्य अद्भुत, ( नः ) = हमारा ( कथा ) = किस अपूर्व ( ऊत्या ) = रक्षण करने वाले सामर्थ्य या ज्ञान से और ( कया ) = किस ( शचिष्ठया ) = शक्ति सम्पन्न बलयुक्त  या बुद्धिमत्तायुक्त आश्चर्यमय शक्ति से ( कया वृता ) = और किस व्यवहार से ( सखा ) = हमारा मित्र ( आभुवद् ) = हो । 
 
Subject
"Missing"
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषिः - वामदेव:। 

 देवता - इन्द्रः।

छन्दः - गायत्री।

स्वरः - षड्जः।