Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 130

1874 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रं꣢ व꣣यं꣡ म꣢हाध꣣न꣢꣫ इन्द्र꣣म꣡र्भे꣢ हवामहे । यु꣡जं꣢ वृ꣣त्रे꣡षु꣢ व꣣ज्रि꣡ण꣢म् ॥१३०॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । व꣣य꣢म् । म꣣हाधने꣣ । महा । धने꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् अ꣡र्भे꣢꣯ । ह꣣वामहे । यु꣡ज꣢꣯म् । वृ꣣त्रे꣡षु꣢ । व꣣ज्रि꣡ण꣢म् ॥१३०॥

Mantra without Swara
इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे । युजं वृत्रेषु वज्रिणम् ॥

इन्द्रम् । वयम् । महाधने । महा । धने । इन्द्रम् अर्भे । हवामहे । युजम् । वृत्रेषु । वज्रिणम् ॥१३०॥

Samveda - Mantra Number : 130
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 2;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = ( महाधने१   ) = बड़े २ संग्राम के अवसर में और ( अर्भे  ) = छोटे मोटे परस्पर के कलह या चोरी आदि के अवसर पर भी ( वयं ) = हम लोग ( वृत्रेषु ) = विघ्न और उपद्रवों और विघ्नकारियों पर ( वज्रिणं ) = सदा तलवार या सेना-बल को या दण्ड को धारण करने हारे, ( युजं ) = सदा सहायक, ( इन्द्रम् ) = राजा को ( वयं ) = हम ( हवामहे ) = बुलाते हैं उसके गुण कीर्त्तन करते हैं। यहां इन्द्र शब्द राजा वाचक है। राजा के दृष्टान्त से उपनिषदों में मुख्य प्राण और आत्मा का वर्णन किया गया है । आत्मा पक्ष में  ( महाधने ) = बड़े भारी योगसाधन और ( अर्भे ) = सूक्ष्म विचार में भी ( वृत्राणि ) = आत्मा पर पर्दा डालने वाली तामस व्युत्थान वृत्तियों पर ( वज्रिणम् ) = सूक्ष्मगति या वर्जक शक्ति अर्थात् असत् को छोड़कर सत् को ग्रहण करने वाले विवेक से युक्त आत्मा का स्मरण करें। जैसे काठक में "यदिदं  किन्च जगत्सर्वं प्राण एजति निः सृतम् । महद्भयं वज्रमुद्यतम् ।" कठ० वल्ली २ ॥
Subject
परमेश्वर की स्तुति
Footnote
१ .महाधनमिति संग्रामनाम ( नि० ३।१८ । ) । अर्भो हरतेः ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
 

ऋषिः - मधुच्छन्दा ।

छन्दः - गायत्री।