Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 123

1874 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
प꣡न्यं꣢पन्य꣣मि꣡त्सो꣢तार꣣ आ꣡ धा꣢वत꣣ म꣡द्या꣢य । सो꣡मं꣢ वी꣣रा꣢य꣣ शू꣡रा꣢य ॥१२३॥

प꣡न्य꣢꣯म्पन्यम् । प꣡न्य꣢꣯म् । प꣣न्यम् । इ꣢त् । सो꣣तारः । आ꣢ । धा꣣वत । म꣡द्या꣢꣯य । सो꣡म꣢꣯म् । वी꣣रा꣡य꣢ । शू꣡रा꣢꣯य ॥१२३॥

Mantra without Swara
पन्यंपन्यमित्सोतार आ धावत मद्याय । सोमं वीराय शूराय ॥

पन्यम्पन्यम् । पन्यम् । पन्यम् । इत् । सोतारः । आ । धावत । मद्याय । सोमम् । वीराय । शूराय ॥१२३॥

Samveda - Mantra Number : 123
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 1;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = हे ( सोतार: ) = ज्ञान सम्पादन करने वाले साधन मेरे इन्दियों ! अथवा हे ज्ञानयोगी पुरुषो ! ( मद्याय ) = सबसे अधिक प्रसन्न  होने वाले ( वीराय ) = सामर्थ्ययुक्त  वीर, विशेष प्रकार से तुम सबको प्रेरणा देने वाले  ( शूराय ) = बलवान् पराक्रमी, आत्मा या परमात्मा के विषयक ( पन्थं   पन्थं  ) = प्रशंसनीय, उत्तम २ ( सोमं ) = यथार्थ अनुभव रूप आनन्दरस को ( आाधावत ) = प्राप्त करने के लिय शीघ्र पहुंचो, शीघ्रता करो ।
 संवित्सिद्धि प्राप्त करने वाले साधक की यही भावना होती है । 
 
Subject
परमेश्वर की स्तुति
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषिः - मेधातिथिराड्गिरसः । 

छन्दः - गायत्री।