Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 101

1874 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- त्रित आप्त्यः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
ज꣣ज्ञानः꣢ स꣣प्त꣢ मा꣣तृ꣡भि꣢र्मे꣣धा꣡माशा꣢꣯सत श्रि꣣ये꣢ । अ꣣यं꣢ ध्रु꣣वो꣡ र꣢यी꣣णां꣡ चि꣢केत꣣दा꣢ ॥१०१॥

ज꣣ज्ञानः꣢ । स꣣प्त꣢ । मा꣣तृ꣡भिः꣢ । मे꣣धा꣢म् । आ । अ꣣शासत । श्रिये꣢ । अ꣣य꣢म् । ध्रु꣣वः꣢ । र꣣यीणा꣢म् । चि꣣केतत् । आ꣢ ॥१०१॥

Mantra without Swara
जज्ञानः सप्त मातृभिर्मेधामाशासत श्रिये । अयं ध्रुवो रयीणां चिकेतदा ॥

जज्ञानः । सप्त । मातृभिः । मेधाम् । आ । अशासत । श्रिये । अयम् । ध्रुवः । रयीणाम् । चिकेतत् । आ ॥१०१॥

Samveda - Mantra Number : 101
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 11;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
भा० = ( अयं ) = यह ( ध्रुवः ) = नित्य, कभी विचलित न होने वाला ( सप्त मातृभिः१  ) = सात माताओं  , सृष्टि के निर्माता पांच भूत, महत् अहंकार इनसे ( जज्ञानः ) = सृष्टि को प्रकट करता हुआ ( श्रिये ) = अपने विभूतिरूप शोभा या आश्रय के लिये ( मेधाम् ) उत्तम धारणा शक्ति  पर ( आशासत ) = वश करता है। वही परमेश्वर ( रयीणां ) = समस्त ऐश्वर्यों को ( आ चिकेतत् ) = भली प्रकार से जानता है ।

अध्यात्म में - यह ध्रुव आत्मा प्रमाता, इन्द्रियों से ज्ञान करता हुआ ( श्रिये ) = अपने कल्याण के लिये ( मेधाम् आशासत ) = मेधा बुद्धि को धारण करता है । ( रयीणाम् ) = सब प्राणों के वीर्यों को जानता है ।

सप्त मातरः = सात प्रमाता, ज्ञान साधन सात मुख्य प्राण हैं जिनको उपनिषत्कार सात ज्वाला, सात ऋषि, सात रथ, सात अश्व, सात अग्नि, सात वह्नि आदि नामों से पुकारते हैं । ( नासिकेत ) = अग्नि ध्रुव अग्नि है जिसका ज्ञान अध्रुव यज्ञ काण्ड से नहीं होता। "नह्मध्रुवै:  प्राप्यते हि ध्रुवं तत्" । का० उप० ।।  इनको ही सात छन्द, सात होता, सात सोम संस्थाओं के नामों से भी पुकारते हैं ।
Subject
परमेश्वर की स्तुति
Footnote
१०१ -- अज्ञानं सप्तमातरः', 'वैधामक्षासत' 'चिकेतयत्' इति ऋ० 'अचिकेतयत्' इति । सा० ।

१. 'सप्तमातरः - सप्त छन्दांसि 'सप्त होत्राः सप्त सोमसस्था; इति ( मा० वि० ) ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
 

ऋषिः - त्रित :।

देवता - पवमानः। 

छन्दः - उष्णिक् ।