Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

Samveda Mantra 1

1874 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡ या꣢हि वी꣣त꣡ये꣢ गृणा꣣नो꣢ ह꣣व्य꣡दा꣢तये । नि꣡ होता꣢꣯ सत्सि ब꣣र्हि꣡षि꣢ ॥१॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ । या꣣हि । वीत꣡ये꣢ । गृ꣣णानः꣢ । ह꣣व्य꣡दा꣢तये । ह꣣व्य꣢ । दा꣣तये । नि꣢ । हो꣡ता꣢꣯ । स꣣त्सि । बर्हि꣡षि꣢ ॥१॥

Mantra without Swara
अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये । नि होता सत्सि बर्हिषि ॥

अग्ने । आ । याहि । वीतये । गृणानः । हव्यदातये । हव्य । दातये । नि । होता । सत्सि । बर्हिषि ॥१॥

Samveda - Mantra Number : 1
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 1;

Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Samveda Sanhita Bhasha Bhashy (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
 भा० = हे अग्ने  परमात्मन् ! ( वीतये१  ) = सर्वत्र प्रकाशक और व्यापक होने और ( हव्यदातये ) = हव्य अर्थात् दान और भोग योग्य पदार्थों के प्रदान करने के लिये आप ( आ यहि ) = प्रात हों । आप ( गृणान :२   ) = स्तुति करने योग्य, ( होता३   ) = सब पदार्थों के देने वाले, यज्ञ में आसन पर होता के समान ( बर्हिषि४   ) = यज्ञ, आत्मा या ब्रह्माण्ड में ( नि सत्सि ) विराजमान हैं।  
Subject
परमेश्वर की स्तुति
Footnote
 १. वीतये — वी गतिव्याप्तिप्रजनकान्त्यसनखादनेषु । २. गृणानः गृ स्तुतौ । व्यत्ययेन कर्मणि कर्तृप्रत्ययः ।  ३. होता- दाता  । आह्वाता-  बुलाने वाला  ।  ईश्वर सबको  अपने पास बुलाता है। और संसार में सबको खाने और परोपकार करने के लिये पदार्थ भी देता है। ४. बर्हिषि - वर्हिः यज्ञः, अन्तरिक्षम्, उदकम्, आसनं, कुशः ।
 
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋषिः - भरद्वाजो बार्हस्पत्यः
छन्दः - गायत्री