Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 976

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣢न्दो꣣ य꣢था꣣ त꣢व꣣ स्त꣢वो꣣ य꣡था꣢ ते जा꣣त꣡मन्ध꣢꣯सः । नि꣢ ब꣣र्हि꣡षि꣢ प्रि꣣ये꣡ स꣢दः ॥९७६॥

इ꣡न्दो꣢꣯ । य꣡था꣢꣯ । त꣡व꣢꣯ । स्त꣡वः꣢꣯ । य꣡था꣢꣯ । ते꣣ । जात꣢म् । अ꣡न्ध꣢꣯सः । नि । ब꣣र्हि꣡षि꣢ । प्रि꣣ये꣢ । स꣣दः ॥९७६॥

Mantra without Swara
इन्दो यथा तव स्तवो यथा ते जातमन्धसः । नि बर्हिषि प्रिये सदः ॥

इन्दो । यथा । तव । स्तवः । यथा । ते । जातम् । अन्धसः । नि । बर्हिषि । प्रिये । सदः ॥९७६॥

Samveda - Mantra Number : 976
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्दो) सोम ! (अन्धसः) देवतों के अन्न (तव) तेरी (यथा) जैसी (स्तवः) प्रशंसा है और (यथा) जैसा (ते) तेरा (जातम्) जन्म है वैसा ही (प्रिये) प्यारे (बर्हिषि) यज्ञ में (नि सदः) स्थित हो। अर्थात् वेदों में जिस प्रकार के सोम की प्रशंसा की गई है वैसा करके यज्ञ में वर्त्तना चाहिये॥
Footnote
ऋ० ९। ५५। २ में भी॥