Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 963

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र꣡ प꣢वमान धन्वसि꣣ सो꣡मेन्द्रा꣢꣯य꣣ मा꣡द꣢नः । नृ꣡भि꣢र्य꣣तो꣡ वि नी꣢꣯यसे ॥९६३॥

प्र꣢ । प꣣वमान । धन्वसि । सो꣡म꣢꣯ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । मा꣡द꣢꣯नः । नृ꣡भिः꣢꣯ । य꣣तः꣢ । वि । नी꣣यसे ॥९६३॥

Mantra without Swara
प्र पवमान धन्वसि सोमेन्द्राय मादनः । नृभिर्यतो वि नीयसे ॥

प्र । पवमान । धन्वसि । सोम । इन्द्राय । मादनः । नृभिः । यतः । वि । नीयसे ॥९६३॥

Samveda - Mantra Number : 963
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) शोध्यमान ! (सोम) सोम ! (नृभिः) कर्मकाण्ड के नायकों से (यतः) नियत किया हुआ जब (विनीयसे) अग्नि में होमा जाता है तब (मादनः) हृष्टिकारक हुआ (इन्द्राय) मेघराज वा सूर्य के लिये (प्रधन्वसि) उच्चता से जाता है॥
Footnote
ऋ० ९। २४। ३ का पाठान्तर संस्कृतभाष्य में देखिये॥