Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 960

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ज꣣ज्ञानो꣡ वाच꣢꣯मिष्यसि꣣ प꣡व꣢मान꣣ वि꣡ध꣢र्मणि । क्र꣡न्दन् दे꣣वो꣡ न सूर्यः꣢꣯ ॥९६०॥

जज्ञानः꣢ । वा꣡च꣢꣯म् । इ꣣ष्यसि । प꣡व꣢꣯मान । वि꣡ध꣢꣯र्मणि । वि । ध꣣र्मणि । क्र꣡न्द꣢꣯न् । दे꣣वः꣢ । न । सू꣡र्यः꣢꣯ ॥९६०॥

Mantra without Swara
जज्ञानो वाचमिष्यसि पवमान विधर्मणि । क्रन्दन् देवो न सूर्यः ॥

जज्ञानः । वाचम् । इष्यसि । पवमान । विधर्मणि । वि । धर्मणि । क्रन्दन् । देवः । न । सूर्यः ॥९६०॥

Samveda - Mantra Number : 960
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) हे पवित्रस्वरूप ! परमात्मन् ! (अज्ञानः सूर्यः देवः न) उदित सूर्य देव की नाई (विधर्मणि) अन्तःकरण में (क्रन्दन्) वैदिक शब्दों को उत्पन्न करते हुए आप (वाचम्) वाणी को (इष्यसि) प्रेरित करते हैं।
जैसे प्रातःकाल होते ही उदित सूर्य प्रकाश फैलाता है, इसी प्रकार परमात्मा सृष्ट्यारम्भ होते ही ऋषियों के पवित्र अन्तःकरण में वेदोपदेश करके उनकी वाणी को प्रेरित करता है॥
Footnote
ऋ० ९। ६४। ९ के पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥