Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 93

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वामदेव: कश्यप:, असितो देवलो वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
रा꣣ये꣡ अ꣢ग्ने म꣣हे꣢ त्वा꣣ दा꣡ना꣢य꣣ स꣡मि꣢धीमहि । ई꣡डि꣢ष्वा꣣ हि꣢ म꣣हे꣡ वृ꣢ष꣣न् द्या꣡वा꣢ हो꣣त्रा꣡य꣢ पृथि꣣वी꣢ ॥९३

रा꣣ये꣢ । अ꣣ग्ने । महे꣢ । त्वा꣣ । दा꣡ना꣢꣯य । सम् । इ꣣धीमहि । ई꣡डि꣢꣯ष्व । हि । म꣣हे꣢ । वृ꣣षन् । द्या꣡वा꣢꣯ । हो꣣त्रा꣡य꣢ । पृ꣣थिवी꣡इ꣢ति ॥९३॥

Mantra without Swara
राये अग्ने महे त्वा दानाय समिधीमहि । ईडिष्वा हि महे वृषन् द्यावा होत्राय पृथिवी ॥९३

राये । अग्ने । महे । त्वा । दानाय । सम् । इधीमहि । ईडिष्व । हि । महे । वृषन् । द्यावा । होत्राय । पृथिवीइति ॥९३॥

Samveda - Mantra Number : 93
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अग्ने) अग्ने ! (महे, राये) महाधन धान्यादि के लाभार्थ (त्वा) तुझको (दानाय) हव्य देने के लिए (समिधीमहि) हम प्रदीप्त करते हैं। (वृषन्) दृष्टि के हेतो ! (द्यावा) आकाश (हि) और (पृथिवी) भूमि पर (महे, होत्राय) मारी, होम के लिए (ईडिष्व) हम वर्णन करते हैं।
अर्थात् धनधान्यादि महालाभों के लिये मनुष्यों को हव्य होमना चाहिये और होम के लिये समिधों में अग्नि को प्रदीप्त करते हुए उसका वर्णन करना चाहिए॥
Footnote
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