Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 918

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मा꣡ पा꣢प꣣त्वा꣡य꣢ नो न꣣रे꣡न्द्रा꣢ग्नी꣣ मा꣡भिश꣢꣯स्तये । मा꣡ नो꣢ रीरधतं नि꣣दे꣢ ॥९१८॥

मा । पा꣣पत्वा꣡य꣢ । नः꣣ । नरा । इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢ । मा । अ꣣भि꣡श꣢स्तये । अ꣣भि꣢ । श꣣स्तये । मा꣢ । नः꣣ । रीरधतम् । निदे꣢ ॥९१८॥

Mantra without Swara
मा पापत्वाय नो नरेन्द्राग्नी माभिशस्तये । मा नो रीरधतं निदे ॥

मा । पापत्वाय । नः । नरा । इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । मा । अभिशस्तये । अभि । शस्तये । मा । नः । रीरधतम् । निदे ॥९१८॥

Samveda - Mantra Number : 918
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(नरा) हे नर (इन्द्राग्नी) अध्यापक और अध्येताओ ! तुम दोनों (नः) हम को (पापत्वाय) पाप होने के लिये (मा) मत (रीरधतम्) प्रेरित करें (अधिशस्तये) निन्दा के लिये (मा) मत प्रेरित करें और (नः) हम को (निदे) निरे नाश वाले काम के लिये (मा) मत प्रेरित करें॥
Footnote
ऋ० ७।७४।३ में भी॥