Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 897

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡रि꣢ णः शर्म꣣य꣢न्त्या꣣ धा꣡र꣢या सोम वि꣣श्व꣡तः꣢ । स꣡रा꣢ र꣣से꣡व꣢ वि꣣ष्ट꣡प꣢म् ॥८९७॥

प꣡रि꣢꣯ । नः꣣ । शर्मय꣡न्त्या꣢ । धा꣡र꣢꣯या । सो꣣म । विश्व꣡तः꣢ । स꣡र꣢꣯ । र꣣सा꣢ । इ꣣व । विष्ट꣡प꣢म् ॥८९७॥

Mantra without Swara
परि णः शर्मयन्त्या धारया सोम विश्वतः । सरा रसेव विष्टपम् ॥

परि । नः । शर्मयन्त्या । धारया । सोम । विश्वतः । सर । रसा । इव । विष्टपम् ॥८९७॥

Samveda - Mantra Number : 897
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सोम) ओषधिराज ! वा हे परमात्मन् (नः) हमारे लिये (शर्मयन्त्या) सुखदायिनी (धारया) धारा से (विश्वतः) सब ओर (परिसर) प्राप्त हूजिये। दृष्टान्त – (रसेव) जैसे नदी (विष्टपम्) नीचे प्रदेश को॥
Footnote
ऋ० ९। ४१। ६ में भी॥