Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 89

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡ग꣢न्म वृत्र꣣ह꣡न्त꣢मं꣣ ज्ये꣡ष्ठ꣢म꣣ग्नि꣡मान꣢꣯वम् । य꣡ स्म꣢ श्रु꣣त꣡र्व꣢न्ना꣣र्क्षे꣢ बृ꣣ह꣡द꣢नीक इ꣣ध्य꣡ते꣢ ॥८९॥

अ꣡ग꣢꣯न्म । वृ꣣त्रह꣡न्त꣢मम् । वृ꣣त्र । ह꣡न्त꣢꣯मम् । ज्ये꣡ष्ठ꣢꣯म् । अ꣣ग्नि꣢म् । आ꣡न꣢꣯वम् । यः । स्म꣣ । श्रुत꣡र्व꣢न् । आ꣣र्क्षे꣢ । बृ꣣ह꣡द꣢नीकः । बृ꣣ह꣢त् । अ꣣नीकः । इध्य꣡ते꣢ ॥८९॥

Mantra without Swara
अगन्म वृत्रहन्तमं ज्येष्ठमग्निमानवम् । य स्म श्रुतर्वन्नार्क्षे बृहदनीक इध्यते ॥

अगन्म । वृत्रहन्तमम् । वृत्र । हन्तमम् । ज्येष्ठम् । अग्निम् । आनवम् । यः । स्म । श्रुतर्वन् । आर्क्षे । बृहदनीकः । बृहत् । अनीकः । इध्यते ॥८९॥

Samveda - Mantra Number : 89
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(यः) जो परमात्मा (आर्क्षे) नक्षत्र सम्बन्धी (बृहदनीके) बड़े समूह में और (श्रुतर्वन्) विख्यात किरण वाले सूर्य में (इध्यते स्म) प्रकाश कर रहा है। उस (वृत्रहन्तमम्) दुष्टबिनाशक (आनवम्) मनुष्य हितकारी (ज्येष्ठम्) महान् (अग्निम्) ज्योतिःप्रद को (अगन्म) जानो।
भौतिक पक्ष में— (यः) जो अग्नि (श्रुतर्वन्) सूर्य तथा (आर्क्ष, बृहदनीके) नक्षत्र सम्बन्धी, बड़े समूह में (इध्यते स्म) प्रकाश कर रहा है। उस (वृत्रहन्तमम्) मेघविदारक शत्रुविध्वंसक (ज्येष्ठम्) बड़े (आनवम्) मनुष्यों के हितकर (अग्निम्) अग्नि को (अगन्म) जानो॥
परमात्मा का उपदेश है कि अग्नि ही सूर्य्यादि नक्षत्रमण्डलों को प्रकाशित कर रहा है। और सूर्य रूप से मेघ वर्षाता तथा वायु आदि की शुद्धि द्वारा मनुष्यों का हित करता है सो जानिये। सायणाचार्य ने गोपवनादि का इतिहास व्याख्यात किया है सो मूल से विरुद्ध है।
Footnote
निघण्टु २। ३ आदि के प्रमाण तथा ऋ० ८। ७४। ४ में जो पाठभेद है, वह संस्कृतभाष्य में देखिये॥