Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 88

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- पूरुरात्रेयः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
बृ꣣हद्व꣢꣫यो꣣ हि꣢ भा꣣न꣡वेऽर्चा꣢꣯ दे꣣वा꣢या꣣ग्न꣡ये꣢ । यं꣢ मि꣣त्रं꣡ न प्रश꣢꣯स्तये꣣ म꣡र्ता꣢सो दधि꣣रे꣢ पु꣣रः꣢ ॥८८॥

बृ꣣ह꣢त् । व꣡यः꣢꣯ । हि । भा꣣न꣡वे꣢ । अ꣡र्च꣢꣯ । दे꣣वा꣡य꣢ । अ꣣ग्न꣡ये꣢ । यम् । मि꣣त्र꣢म् । मि꣣ । त्रं꣢ । न । प्र꣡श꣢꣯स्तये । प्र । श꣣स्तये । म꣡र्ता꣢꣯सः । द꣣धिरे꣢ । पु꣣रः꣢ । ॥८८॥

Mantra without Swara
बृहद्वयो हि भानवेऽर्चा देवायाग्नये । यं मित्रं न प्रशस्तये मर्तासो दधिरे पुरः ॥

बृहत् । वयः । हि । भानवे । अर्च । देवाय । अग्नये । यम् । मित्रम् । मि । त्रं । न । प्रशस्तये । प्र । शस्तये । मर्तासः । दधिरे । पुरः । ॥८८॥

Samveda - Mantra Number : 88
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
परमात्मा उपदेश करता है कि हे मनुष्य तू (यम्, मित्रं, न) जिसका, मित्र के समान (प्रशस्तये) स्तुति के लिये (मर्त्तासः) मनुष्य लोग (पुरः, दघिरे) मुख्यतः ध्यान करते हैं। उस (भानवे, देवाय, अग्नये) प्रकाशमान, देव, परमात्मा के लिये (हि) निश्चय (बृहत्, वयः, अर्च) बड़ी, आयु, अर्पित कर॥
भौतिक पक्ष में हे मनुष्य ! तू (यम्, मित्रं न) जिसे, मित्र के, समान (मर्त्तासः) मनुष्य लोग (प्रशस्तये) वेदोक्त वर्णन के लिये (पुरः, दधिरे) आगे स्थापित करते हैं। उस (भानवे, देवाय, अग्नये) प्रकाशयुक्त, देव, अग्नि के लिये (हि) निश्चय (बृहत्) बड़े-बड़े (वयः) स्थालीपाकादि अन्न (अर्च) चढ़ावें॥
सुगन्ध मिष्ट पुष्ट इत्यादि उत्तम अन्नों को घृतादि से पाक करके बड़े भारी हवन करो और साथ में वेदोक्त वर्णन करते जाओ। जिससे पूर्व प्रतिपादित वृष्ट्यादि द्वारा उपकार हो।
Footnote
निघण्टु २। ७। का प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ (ऋग्वेद ५।१६।१) मैं भी ऐसा ही पाठ है॥