Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 862

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- पुरुहन्मा आङ्गिरसः Chhand- प्रगाथः(विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
य꣡द् द्याव꣢꣯ इन्द्र ते श꣣त꣢ꣳश꣣तं꣡ भूमी꣢꣯रु꣣त स्युः । न꣡ त्वा꣢ वज्रिन्त्स꣣ह꣢स्र꣣ꣳ सू꣢र्या꣣ अ꣢नु꣣ न꣢ जा꣣त꣡म꣢ष्ट꣣ रो꣡द꣢सी ॥८६२॥

य꣢त् । द्या꣡वः꣢꣯ । इ꣣न्द्र । ते । श꣢तम् । श꣣त꣢म् । भू꣡मीः꣢꣯ । उ꣣त꣢ । स्युः । न । त्वा꣣ । वज्रिन् । सह꣡स्र꣢म् । सू꣡र्या꣢꣯ । अ꣡नु꣢꣯ । न । जा꣣त꣢म् । अ꣣ष्ट । रो꣡द꣢꣯सी꣣इ꣡ति꣢ ॥८६२॥

Mantra without Swara
यद् द्याव इन्द्र ते शतꣳशतं भूमीरुत स्युः । न त्वा वज्रिन्त्सहस्रꣳ सूर्या अनु न जातमष्ट रोदसी ॥

यत् । द्यावः । इन्द्र । ते । शतम् । शतम् । भूमीः । उत । स्युः । न । त्वा । वज्रिन् । सहस्रम् । सूर्या । अनु । न । जातम् । अष्ट । रोदसीइति ॥८६२॥

Samveda - Mantra Number : 862
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
इसकी व्याख्या (२७८) में हो चुकी है॥
Footnote
इसकी टिप्पणी में विवरणकार कहते हैं कि “माध्यंदिन सवन कहा गया, अब पृष्ठ कहे जाते हैं—” इस प्रथम मन्त्र की व्याख्या छन्द आर्चिक २७८ संख्या पर कर आये हैं। छः दिन का १ पृष्ठ होता है। यथा—१ रथन्तर, २ बृहत्, ३ विरूप, ४ वैराज ५ शाक्वर और ६ रैवत। इसी प्रकार क्रम से इन छः पृष्ठ दिनों के ६ पृष्ठधर्म हैं। जैसे—१ रथघोष, २ दुन्दुभ्याहनन, ३ उपवाजन, ४ उरोग्निमन्थन, ५ आर्याघोष और ६ गवांघोष॥