Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 814

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- प्रगाथः(विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
म꣡त्स्वा꣢ सुशिप्रिन्हरिव꣣स्त꣡मी꣢महे꣣ त्व꣡या꣢ भूषन्ति वे꣣ध꣡सः꣢ । त꣢व꣣ श्र꣡वा꣢ꣳस्युप꣣मा꣡न्यु꣢क्थ्य सु꣣ते꣡ष्वि꣢न्द्र गिर्वणः ॥८१४॥

म꣡त्स्व꣢꣯ । सु꣣शिप्रिन् । सु । शिप्रिन् । हरिवः । त꣢म् । ई꣣महे । त्व꣡या꣢꣯ । भू꣣षन्ति । वे꣡धसः꣢ । त꣡व꣢꣯ । श्र꣡वा꣢꣯ꣳसि । उ꣣प꣡मानि꣡ । उ꣣प । मा꣡नि꣢꣯ । उ꣡क्थ्य । सुते꣡षु꣢ । इ꣢न्द्र । गिर्वणः । गिः । वनः ॥८१४॥

Mantra without Swara
मत्स्वा सुशिप्रिन्हरिवस्तमीमहे त्वया भूषन्ति वेधसः । तव श्रवाꣳस्युपमान्युक्थ्य सुतेष्विन्द्र गिर्वणः ॥

मत्स्व । सुशिप्रिन् । सु । शिप्रिन् । हरिवः । तम् । ईमहे । त्वया । भूषन्ति । वेधसः । तव । श्रवाꣳसि । उपमानि । उप । मानि । उक्थ्य । सुतेषु । इन्द्र । गिर्वणः । गिः । वनः ॥८१४॥

Samveda - Mantra Number : 814
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सुशिप्रिन्) हे उत्तम व्याप्ति वाले ! (हरिवः) कर्मों की धरोहर रखने वाले ! (उक्थ्य) स्तुत्य ! (गिर्वणः) वाणियों से भजनीय ! (इन्द्र) परमेश्वर ! (तम्) पूर्वोक्त गुणगरिष्ठ आप से (ईमहे) हम मांगते हैं प्रार्थना करते हैं कि (त्वया) आपकी सहायता से (वेधसः) बोधयुक्त उपासक लोग (भूषन्ति) शोभमान होते हैं। (तव) आपके (श्रवांसि) यश (उपमानि) उपमान हैं, न कि किसी से उपमेय। वह आप (सुतेषु) पुत्रतुल्य भक्तों पर (मत्स्व) प्रसन्न हूजिये॥
Footnote
उणादि २। १३ इत्यादि के प्रमाण और ऋ० ८। ९९। २ के पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥