Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 800

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रे꣢ अ꣣ग्ना꣡ नमो꣢꣯ बृ꣣ह꣡त्सु꣢वृ꣣क्ति꣡मेर꣢꣯यामहे । धि꣣या꣡ धेना꣢꣯ अव꣣स्य꣡वः꣢ ॥८००॥

इ꣡न्द्रे꣢꣯ । अ꣣ग्ना꣢ । न꣡मः꣢꣯ । बृ꣣ह꣢त् । सु꣣वृक्ति꣢म् । सु꣣ । वृक्ति꣢म् । आ । ई꣣रयामहे । धिया꣢ । धे꣡नाः꣣ । अ꣣वस्य꣡वः꣢ ॥८००॥

Mantra without Swara
इन्द्रे अग्ना नमो बृहत्सुवृक्तिमेरयामहे । धिया धेना अवस्यवः ॥

इन्द्रे । अग्ना । नमः । बृहत् । सुवृक्तिम् । सु । वृक्तिम् । आ । ईरयामहे । धिया । धेनाः । अवस्यवः ॥८००॥

Samveda - Mantra Number : 800
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रे) सूर्य वा विद्युत् और (अग्ना) अग्नि के निमित्त (बृहत्) बहुत (नमः) हृव्य का (आ ईरयामहे) हम होम करते हैं। और (अवस्यवः) अपनी रक्षा चाहते हुए हम (धिया) यज्ञ कर्म के साथ (धेनाः) वेदवाणियों को उच्चारित करते हैं। तथा (सुवृक्तिम्) [ऋत्विज् आदिकों का] भले प्रकार वरण करते हैं।
Footnote
अष्टाध्यायी ७। १। ३९ निघण्टु २। ७॥ २। १। १। ११ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ७। ९४। ४ में भी॥