Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 775

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢स्व वा꣣चो꣡ अ꣢ग्रि꣣यः꣡ सोम꣢꣯ चि꣣त्रा꣡भि꣢रू꣣ति꣡भिः꣢ । अ꣣भि꣡ विश्वा꣢꣯नि꣣ का꣡व्या꣢ ॥७७५॥

प꣡व꣢꣯स्व । वा꣣चः꣢ । अ꣣ग्रियः꣢ । सो꣡म꣢꣯ । चि꣣त्रा꣡भिः꣢ । ऊति꣡भिः꣢ । अ꣣भि꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯नि । का꣡व्या꣢꣯ ॥७७५॥

Mantra without Swara
पवस्व वाचो अग्रियः सोम चित्राभिरूतिभिः । अभि विश्वानि काव्या ॥

पवस्व । वाचः । अग्रियः । सोम । चित्राभिः । ऊतिभिः । अभि । विश्वानि । काव्या ॥७७५॥

Samveda - Mantra Number : 775
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सोमः) हे शान्तस्वरूप ! परमात्मन् ! (अप्रियः) सब में मुख्य आप (विश्वानि) सब (काव्या) स्तोत्रों और (वाचः) प्रार्थनाओं को (चित्राभिः) अनेक प्रकार की (ऊतिभिः) रक्षाओं से (अभि) सर्वतः (पवस्व) पवित्र कीजिये॥
Footnote
विवरणकार लिखते हैं कि अब द्वितीय दिन का आरम्भ होता है और दूसरे ही प्रपाठक का। पञ्चदश स्तोम का दूसरा दिन होता है।
ऋ० ९। ६२। २५ में भी॥