Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 744

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡नु꣢ प्र꣣त्न꣡स्यौक꣢꣯सो हु꣣वे꣡ तु꣢विप्र꣣तिं꣡ नर꣢꣯म् । यं꣢ ते꣣ पू꣡र्वं꣢ पि꣣ता꣢ हु꣣वे꣢ ॥७४४॥

अ꣣नु꣢꣯ । प्र꣣त्न꣡स्य꣢ । ओ꣡क꣢꣯सः । हु꣣वे꣢ । तु꣣विप्रति꣢म् । तु꣣वि । प्रति꣢म् । न꣡र꣢꣯म् । यम् । ते꣣ । पू꣡र्व꣢꣯म् । पि꣣ता꣢ । हु꣣वे꣢ ॥७४४॥

Mantra without Swara
अनु प्रत्नस्यौकसो हुवे तुविप्रतिं नरम् । यं ते पूर्वं पिता हुवे ॥

अनु । प्रत्नस्य । ओकसः । हुवे । तुविप्रतिम् । तुवि । प्रतिम् । नरम् । यम् । ते । पूर्वम् । पिता । हुवे ॥७४४॥

Samveda - Mantra Number : 744
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(प्रत्नस्य) सनातन (ओकसः) मोक्षपद के (अनु) आनुकूल्य से (नरम्) ले जाने वाले (तुविप्रतिम्) बहुत समय के प्रति पहुँचाने वाले (ते) आप को (हुवे) मैं स्तुत करता हूँ (यम्) जिस आपको (पूर्वम्) इससे पूर्व (पिता) मेरे गुरु ने (हुवे) स्तुत किया है॥
शिष्य प्रशिष्यों को गुरुपरम्परा से परमात्मा की स्तुति प्रार्थना उपासना करनी चाहिए यह भाव है॥
Footnote
ऋ० १। ३०। ९ में भी॥