Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 739

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र꣡ ते꣢ अश्नोतु कु꣣क्ष्योः꣢꣫ प्रेन्द्र꣣ ब्र꣡ह्म꣢णा꣣ शि꣡रः꣢ । प्र꣢ बा꣣हू꣡ शू꣢र꣣ रा꣡ध꣢सा ॥७३९॥

प्र꣢ । ते꣣ । अश्नोतु । कुक्ष्योः꣢ । प्र । इ꣣न्द्र । ब्र꣡ह्म꣢꣯णा । शि꣡रः꣢꣯ । प्र । बा꣣हू꣡इति꣢ । शू꣣र । रा꣡ध꣢꣯सा ॥७३९॥

Mantra without Swara
प्र ते अश्नोतु कुक्ष्योः प्रेन्द्र ब्रह्मणा शिरः । प्र बाहू शूर राधसा ॥

प्र । ते । अश्नोतु । कुक्ष्योः । प्र । इन्द्र । ब्रह्मणा । शिरः । प्र । बाहूइति । शूर । राधसा ॥७३९॥

Samveda - Mantra Number : 739
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(शूर) वीर ! (इन्द्र) राजन् ! (ते) आपकी (कुक्ष्योः) दोनों कोखों में (प्र, अश्नोतु) उक्त सोमरस व्याप जावे (ब्रह्मणा) भोजन के रस के साथ (शिरः) शिर को (प्र) व्याप जावे और (राधसा) धनैश्वर्य के साथ (बाहू) दोनों भुजाओं को (प्र) व्याप जावे॥
Footnote
निघं० २। ७॥ २। १० अष्टाध्यायी ३। १। ८५ के प्रमाण और ऋ० ३। ५१। १२ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥