Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 730

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कुसीदी काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
न꣡ हि त्वा꣢꣯ शूर दे꣣वा꣡ न मर्ता꣢꣯सो꣣ दि꣡त्स꣢न्तम् । भी꣣मं꣢꣫ न गां वा꣣र꣡य꣢न्ते ॥७३०॥

न । हि । त्वा꣣ । शूर । देवाः꣢ । न । म꣡र्ता꣢꣯सः । दि꣡त्स꣢꣯न्तम् । भी꣣म꣢म् । न । गाम् । वा꣣र꣡य꣢न्ते ॥७३०॥

Mantra without Swara
न हि त्वा शूर देवा न मर्तासो दित्सन्तम् । भीमं न गां वारयन्ते ॥

न । हि । त्वा । शूर । देवाः । न । मर्तासः । दित्सन्तम् । भीमम् । न । गाम् । वारयन्ते ॥७३०॥

Samveda - Mantra Number : 730
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(शूर) पराक्रमी राजन् ! (दित्सन्तम्) शत्रुओं के शिर काटना चाहते हुए (गाम्) बैल के (न) तुल्य बली (त्वा) आपको (देवाः) देवता (न, हि) नहीं (मर्त्तासः) और मनुष्य (न) नहीं (वारयन्ते) रोकते॥
अर्थात् दैवी और मानुषी कोई बाधा विघ्न नहीं कर सकतीं। विज्ञान बल से दैवी और बाहुबल से मानुषी रुकावटों को आप हटा सकते हैं।
Footnote
ऋ० ८। ८१। ३ में भी॥