Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 73

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- बुधगविष्टिरावात्रेयौ Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡बो꣢ध्य꣣ग्निः꣢ स꣣मि꣢धा꣣ ज꣡ना꣢नां꣣ प्र꣡ति꣢ धे꣣नु꣡मि꣢वाय꣣ती꣢मु꣣षा꣡स꣢म् । य꣣ह्वा꣡ इ꣢व꣣ प्र꣢ व꣣या꣢मु꣣ज्जि꣡हा꣢नाः꣣ प्र꣢ भा꣣न꣡वः꣢ सस्रते꣣ ना꣢क꣣म꣡च्छ꣢ ॥७३॥

अ꣡बो꣢꣯धि । अ꣣ग्निः꣢ । स꣣मि꣡धा꣢ । स꣣म् । इ꣡धा꣢꣯ । ज꣡ना꣢꣯नाम् । प्र꣡ति꣢꣯ । धे꣣नु꣢म् । इ꣣व । आयती꣢म् । आ꣣ । यती꣢म् । उ꣣षा꣡स꣢म् । य꣣ह्वाः꣢ । इ꣣व । प्र꣢ । व꣣या꣢म् । उ꣣ज्जि꣡हा꣢नाः । उ꣣त् । जि꣡हा꣢꣯नाः । प्र । भा꣣न꣡वः꣢ । स꣣स्रते । ना꣡क꣢꣯म् । अ꣡च्छ꣢꣯ ॥७३॥

Mantra without Swara
अबोध्यग्निः समिधा जनानां प्रति धेनुमिवायतीमुषासम् । यह्वा इव प्र वयामुज्जिहानाः प्र भानवः सस्रते नाकमच्छ ॥

अबोधि । अग्निः । समिधा । सम् । इधा । जनानाम् । प्रति । धेनुम् । इव । आयतीम् । आ । यतीम् । उषासम् । यह्वाः । इव । प्र । वयाम् । उज्जिहानाः । उत् । जिहानाः । प्र । भानवः । सस्रते । नाकम् । अच्छ ॥७३॥

Samveda - Mantra Number : 73
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 8;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अग्निः) अग्नि (जनानाम्) यज्ञकर्त्ताओं की (समिधा) समिघ् से (अबोधि) प्रज्वलित होता तब (धेनुमिव) दुग्ध देने वाली गौ के समान (आयतीम्, उषासम्, प्रति) आती हुई, उषा के प्रति, अर्थात् प्रातःकाल ही (मानवः) लपटें (वयाम्, प्र, उज्जिहानाः) पक्षी के बच्चे को छोड़ते हुए (यह्वा इव) बड़े पक्षियों के समान (अच्छ) अच्छे प्रकार (नाकम्) द्युलोक की ओर (प्र, सस्रते) फैलती हैं॥
जिस प्रकार छोटे बच्चों को छोड़ कर पक्षिगण आकाश को उड़ जाते हैं इसी प्रकार प्रातःकाल के हवन समय जब अग्न्याधान करके समिदाधान किया जाता है और अग्नि का उद्बोधन होता है तब लपटें वेदी को छोड़कर भले प्रकार से आकाश को चलती हैं और उपकार करती हैं॥
Footnote
अष्टाध्यायी ६। ३। १३७ निघण्टु ३। ३ उणादि ३। ३२ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋग्वेद ५।१।१ में “सिस्रते” इतना पाठभेद है॥