Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 684

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- पादनिचृत् (गायत्री) Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भी꣢꣫ षु णः꣣ स꣡खी꣢नामवि꣣ता꣡ ज꣢रितॄ꣣णा꣢म् । श꣣तं꣡ भ꣢वास्यू꣣त꣡ये꣢ ॥६८४॥

अ꣣भि꣢ । सु । नः꣣ । स꣡खी꣢꣯नाम् । स । खी꣣नाम् । अविता꣢ । ज꣣रितॄणा꣢म् । श꣣त꣢म् । भ꣣वासि । ऊत꣡ये꣢ ॥६८४॥

Mantra without Swara
अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम् । शतं भवास्यूतये ॥

अभि । सु । नः । सखीनाम् । स । खीनाम् । अविता । जरितॄणाम् । शतम् । भवासि । ऊतये ॥६८४॥

Samveda - Mantra Number : 684
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(नः) मेरी सृष्टि में स्थित (जरितृणाम्) बूढ़े निर्बल और (सखीनाम्) तुझ से शत्रुभाव न करके मित्रभाव रखने वालों को (शतम्) बहुत (सु) अच्छे (अभि) सर्वतः (ऊतये) रक्षा के लिये हे राजन् ! तू (अविता) रक्षक (भवासि) हो॥
Footnote
विवरण के मत से श्री सत्यव्रत कहते हैं कि यह “मैत्रावरुण पृष्ठ” कहाता है॥
ऋग्वेद ४। ३१। ३ में “ऊतिभिः” पाठ है॥