Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 668

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ब्र꣣ह्मा꣡ण꣢स्त्वा यु꣣जा꣢ व꣣य꣡ꣳ सो꣢म꣣पा꣡मि꣢न्द्र सो꣣मि꣡नः꣢ । सु꣣ता꣡व꣢न्तो हवामहे ॥६६८॥

ब्र꣣ह्मा꣡णः꣢ । त्वा꣣ । युजा꣢ । व꣣य꣢म् । सो꣣मपा꣢म् । सो꣣म । पा꣢म् । इ꣣न्द्र । सो꣡मिनः꣢ । सु꣣ता꣡वन्तः꣢ । ह꣣वामहे ॥६६८॥

Mantra without Swara
ब्रह्माणस्त्वा युजा वयꣳ सोमपामिन्द्र सोमिनः । सुतावन्तो हवामहे ॥

ब्रह्माणः । त्वा । युजा । वयम् । सोमपाम् । सोम । पाम् । इन्द्र । सोमिनः । सुतावन्तः । हवामहे ॥६६८॥

Samveda - Mantra Number : 668
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) परमेश्वर ! (सोमिनः) सौम्य भाव वाले (सुतावन्तः) हृदय शुद्ध कर चुकने वाले (ब्रह्माणः) वेदवेत्ता (वयम्) हम योगी लोग (युजा) योग से (सोमपां त्वा) सौम्य भाव वालों के ग्राहक आपको (हवामहे) पुकारते हैं।
यहा — (इन्द्र) विद्युत् ! (सोमिनः) सोमरसवाले (सुतावन्तः) अभिषव कर चुकने वाले (ब्रह्माणः) ब्रह्मा आदि (वयम्) हम ऋत्विज् लोग (युजा) सम्बन्ध से (सोमपाम्) सोमरस शोषने वाले (त्वा) तुझको (हवामहे) वरित करने हैं।
Footnote
ऋ० ८। १७। ३ में “वयं पूजा” ऐसा उलट कर पाठ है॥