Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 655

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
हि꣣न्वानो꣢ हे꣣तृ꣡भि꣢र्हि꣣त꣡ आ वाजं꣢꣯ वा꣣꣬ज्य꣢꣯क्रमीत् । सी꣡द꣢न्तो व꣣नु꣡षो꣢ यथा ॥६५५॥

हि꣣न्वानः꣢ । हे꣣तृ꣡भिः꣢ । हि꣣तः꣢ । आ । वा꣡जम्꣢꣯ । वा꣣जी꣢ । अ꣣क्रमीत् । सी꣡द꣢꣯न्तः । व꣣नु꣡षः꣢ । य꣣था ॥६५५॥

Mantra without Swara
हिन्वानो हेतृभिर्हित आ वाजं वाज्यक्रमीत् । सीदन्तो वनुषो यथा ॥

हिन्वानः । हेतृभिः । हितः । आ । वाजम् । वाजी । अक्रमीत् । सीदन्तः । वनुषः । यथा ॥६५५॥

Samveda - Mantra Number : 655
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(यथा) जिस प्रकार (हेतृभिः) प्रेरकों से (हिन्वानः) प्रेरित किया हुआ (वनुषः) वीर (हितः) कहने में चलने वाला (वाजी) बलवान् (आवाजम्) बल वा शक्ति भर (अक्रमीत्) दौड़ता है, वैसे ही (सीदन्तः) शीघ्र गति से चलते हुए सोम दौड़ते हैं। निधं० २। १४ में वनुष्यति का अर्थ क्रोध या वीरता है॥
Footnote
ऋ० ९। ६४। २९ में भी॥