Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 651

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣡पा꣢स्मै गायता नरः꣣ प꣡व꣢माना꣣ये꣡न्द꣢वे । अ꣣भि꣢ दे꣣वा꣡ꣳ इय꣢꣯क्षते ॥६५१॥

उ꣡प꣢꣯ । अ꣣स्मै । गायत । नरः । प꣡व꣢꣯मानाय । इ꣡न्द꣢꣯वे । अ꣣भि꣢ । दे꣣वा꣢न् । इ꣡य꣢꣯क्षते ॥६५१॥

Mantra without Swara
उपास्मै गायता नरः पवमानायेन्दवे । अभि देवाꣳ इयक्षते ॥

उप । अस्मै । गायत । नरः । पवमानाय । इन्दवे । अभि । देवान् । इयक्षते ॥६५१॥

Samveda - Mantra Number : 651
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(नरः) हे मनुष्यो ! (अस्मै) इस (पवमानाय) पावन शुद्धिकारक (इन्दवे) परमैश्वर्यवान् (देवान्) देवतों को (अभि इयक्षते) लक्ष्य करके अपना ज्ञानप्रदानरूप यजन करना चाहते हुए परमात्मा के लिए (उप गायत) उपगान करो। इस क्रिया से स्तोमगान की भी ध्वनि ध्वनित है॥
अथवा — (इन्दवे) सोम ओषधि के लिए। शेष पूर्ववत् जानो॥
Footnote
ऋग्वेद ९। ११। १ में भी॥