Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 640

1875 Mantra
Devata- सूर्यः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
स꣣प्त꣡ त्वा꣢ ह꣣रि꣢तो꣣ र꣢थे꣣ व꣡ह꣢न्ति देव सूर्य । शो꣣चि꣡ष्के꣢शं विचक्षण ॥६४०॥

स꣣प्त꣢ । त्वा꣣ । हरि꣡तः꣢ । र꣡थे꣢꣯ । व꣡ह꣢꣯न्ति । दे꣣व । सूर्य । शोचि꣡ष्केश꣢म् । शो꣣चिः꣢ । के꣣शम् । विचक्षण । वि । चक्षण ॥६४०॥

Mantra without Swara
सप्त त्वा हरितो रथे वहन्ति देव सूर्य । शोचिष्केशं विचक्षण ॥

सप्त । त्वा । हरितः । रथे । वहन्ति । देव । सूर्य । शोचिष्केशम् । शोचिः । केशम् । विचक्षण । वि । चक्षण ॥६४०॥

Samveda - Mantra Number : 640
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(देव) दिव्यगुणयुक्त! (विचक्षण) सब के प्रकाशक ! (सूर्य) सूर्य ! (शोचिष्केशम्) तेज रूपी केशों वाले (त्वा) तुझको (सप्त) सात (हरितः) हारक किरणें (वहन्ति) प्राणियों तक पहुँचाती है॥
यद्यपि सूर्य एकत्र स्थित है, परन्तु अपनी ७ रंग की किरणों से हमें तथा अन्य लोकों को प्राप्त समझा जाता हैं।
Footnote
निघण्टु १। १५॥ १। ५॥ १। १७ निरुक्त २। २७॥ २। १५॥ १२। २५ निरुक्तपरिशिष्ट २। २१ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये। ऋ० १। ५०। ८ में भी॥