Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 633

1875 Mantra
Devata- सूर्यः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
अ꣢प꣣ त्ये꣢ ता꣣य꣡वो꣢ यथा꣣ न꣡क्ष꣢त्रा यन्त्य꣣क्तु꣡भिः꣢ । सू꣡रा꣢य वि꣣श्व꣡च꣢क्षसे ॥६३३॥

अ꣡प꣢꣯ । त्ये । ता꣣य꣡वः꣢ । य꣣था । न꣡क्ष꣢꣯त्रा । य꣣न्ति । अक्तु꣡भिः꣢ । सू꣡रा꣢꣯य । वि꣣श्व꣡च꣢क्षसे । वि꣣श्व꣢ । च꣣क्षसे ॥६३३॥

Mantra without Swara
अप त्ये तायवो यथा नक्षत्रा यन्त्यक्तुभिः । सूराय विश्वचक्षसे ॥

अप । त्ये । तायवः । यथा । नक्षत्रा । यन्ति । अक्तुभिः । सूराय । विश्वचक्षसे । विश्व । चक्षसे ॥६३३॥

Samveda - Mantra Number : 633
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(विश्वचक्षसे) सबके प्रकाश (सूराय) सूर्य के लिये (यथा) जैसे (नक्षत्रा) नक्षत्र = तारागण (अक्तुभिः) रात्रियों के साथ (अपयन्ति) भाग जाते हैं, ऐसे ही (त्ये) वे भी जो कि (तायवः) चोर हैं, भाग जाते हैं॥
अर्थात् यदि सूर्य न हो तो सदा रात्रि रहे और तस्कर लोग संसार की लूट मार किया करें। अथवा परमात्मा न हो तो संसार में वेदोपदेश के अभाव से धर्माऽधर्म का ज्ञान प्रवृत्त न हो और ऐसा होने पर सब, सबको लूटें खसोटें और बड़ी दुरवस्था हो जावे॥
Footnote
ऋ० १। ५०। २ में भी॥