Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 580

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- ऋजिश्वा भारद्वाजः Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ सो꣢ता꣣ प꣡रि꣢ षिञ्च꣣ता꣢श्वं꣣ न꣡ स्तोम꣢꣯म꣣प्तु꣡र꣢ꣳ रज꣣स्तु꣡र꣢म् । व꣣नप्रक्ष꣡मु꣢द꣣प्रु꣡त꣢म् ॥५८०॥

आ꣢ । सो꣣त । प꣡रि꣢꣯ । सि꣣ञ्चत । अ꣡श्व꣢꣯म् । न । स्तो꣡म꣢꣯म् । अ꣣प्तु꣡र꣢म् । र꣣जस्तु꣡र꣢म् । व꣣नप्रक्ष꣢म् । व꣣न । प्रक्ष꣢म् । उ꣣दप्रु꣡त꣢म् । उ꣣द । प्रु꣡त꣢꣯म् ॥५८०॥

Mantra without Swara
आ सोता परि षिञ्चताश्वं न स्तोममप्तुरꣳ रजस्तुरम् । वनप्रक्षमुदप्रुतम् ॥

आ । सोत । परि । सिञ्चत । अश्वम् । न । स्तोमम् । अप्तुरम् । रजस्तुरम् । वनप्रक्षम् । वन । प्रक्षम् । उदप्रुतम् । उद । प्रुतम् ॥५८०॥

Samveda - Mantra Number : 580
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 11;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे ऋत्विजो ! (अश्वं न) अश्व के समान वेगवान (स्तोमम्) प्रशंसनीय (अप्तुरम्) जलों से प्रेरक (रजस्तुरम्) और तेज के प्रेरक (वनप्रक्षम्) जल से मिले हुए (उदप्रुतम्) जल में तिरने वाले सोम को (आ सोत) अभिषुत करो (परिषिञ्चत) और सब ओर फैलाओ॥
Footnote
अष्टाध्यायी ७। १। १४५ निरखत ४। १९ के प्रमाण और ऋ० ९। १०८। ७ का पाठान्तर संस्कृतभाष्य में देखिये॥