Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 567

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- चक्षुर्मानवः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣡ ध꣢न्वा सोम꣣ जा꣡गृ꣢वि꣣रि꣡न्द्रा꣢येन्दो꣣ प꣡रि꣢ स्रव । द्यु꣣म꣢न्त꣣ꣳ शु꣢ष्म꣣मा꣡ भ꣢र स्व꣣र्वि꣡द꣢म् ॥५६७॥

प्र꣢ । ध꣣न्व । सोम । जा꣡गृ꣢꣯विः । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । इ꣣न्दो । प꣡रि꣢꣯ । स्र꣣व । द्युम꣡न्त꣢म् । शु꣡ष्म꣢꣯म् । आ । भ꣣र । स्वर्वि꣡द꣢म् । स्वः꣣ । वि꣡द꣢꣯म् ॥५६७॥

Mantra without Swara
प्र धन्वा सोम जागृविरिन्द्रायेन्दो परि स्रव । द्युमन्तꣳ शुष्ममा भर स्वर्विदम् ॥

प्र । धन्व । सोम । जागृविः । इन्द्राय । इन्दो । परि । स्रव । द्युमन्तम् । शुष्मम् । आ । भर । स्वर्विदम् । स्वः । विदम् ॥५६७॥

Samveda - Mantra Number : 567
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे शान्तस्वरूप ! (इन्दो) परमेश्वर ! (जागृविः) चेतनस्वरूप आप (इन्द्राय) जीवात्मा के लिए (परिस्रव) अमृत वर्षाइये (प्र धन्व) और [हमें] प्राप्त हूजिये। तथा (द्युमन्तम्) प्रकाशयुक्त (स्वर्विदम्) मोक्षदायक (शुष्मम्) बल (आभर) पहुँचाइये॥
भौतिक पक्ष में—(इन्दो) गीले ! (सोम) सोमरस ! (जागृविः) शरीर को चेताने वाला (इन्द्राय) विद्युत् के लिए (प्र धन्व) प्राप्त हो और (परिस्रव) वृष्टि कर और (द्युमन्तम्) प्रकाशयुक्त (स्वर्विदम्) सुखदायक (शुष्मम्) बल को (आभर) पहुँचा।
Footnote
निघण्टु २। १४ और २। ९ के प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥
ऋ० ९। १०६। ४ में भी॥