Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 546

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- नहुषो मानवः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣यं꣢ पू꣣षा꣢ र꣣यि꣢꣫र्भगः꣣ सो꣡मः꣢ पुना꣣नो꣢ अ꣢र्षति । प꣡ति꣣र्वि꣡श्व꣢स्य꣣ भू꣡म꣢नो꣣꣬ व्य꣢꣯ख्य꣣द्रो꣡द꣢सी उ꣣भे꣢ ॥५४६॥

अ꣣य꣢म् । पू꣣षा꣢ । र꣣यिः꣢ । भ꣡गः꣢꣯ । सो꣡मः꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । अ꣣र्षति । प꣡तिः꣢꣯ । वि꣡श्व꣢꣯स्य । भू꣡म꣢꣯नः । वि । अ꣣ख्यत् । रो꣡द꣢꣯सी꣣इ꣡ति꣢ । उ꣣भे꣡इति꣢ ॥५४६॥

Mantra without Swara
अयं पूषा रयिर्भगः सोमः पुनानो अर्षति । पतिर्विश्वस्य भूमनो व्यख्यद्रोदसी उभे ॥

अयम् । पूषा । रयिः । भगः । सोमः । पुनानः । अर्षति । पतिः । विश्वस्य । भूमनः । वि । अख्यत् । रोदसीइति । उभेइति ॥५४६॥

Samveda - Mantra Number : 546
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 8;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
हे मित्रो ! (अयं सोमः) यह सोम वा परमात्मा (पूषा) पुष्टिकर्त्ता (भगः) सबको सेवनीय (रयिः) धनदायक (पुनानः) पवित्रता का सम्पादक (अर्षति) कलश वा आकाश वा पवित्र हृदय में प्राप्त होता है। तथा (विश्वस्य) सब (भूमनः) प्राणिवर्ग का (पतिः) पालन करने वाला, (उभे रोदसी) दोनों पृथिवी लोक और द्युलोक को (व्यख्यत्) अपने प्रभाव से प्रकाशित करता है। विवरणकार कहते हैं कि इसका विनियोग ज्योतिष्टोम यज्ञ के दूसरे दिन में है॥
Footnote
ऋ० ९। १०१। ७ में भी॥