Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 543

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡स꣢र्जि꣣ व꣢क्वा꣣ र꣢थ्ये꣣ य꣢था꣣जौ꣢ धि꣣या꣢ म꣣नो꣡ता꣢ प्रथ꣣मा꣡ म꣢नी꣣षा꣣ । द꣢श꣣ स्व꣡सा꣢रो꣣ अ꣢धि꣣ सा꣢नो꣣ अ꣡व्ये꣢ मृ꣣ज꣢न्ति꣣ व꣢ह्नि꣣ꣳ स꣡द꣢ने꣣ष्व꣡च्छ꣢ ॥५४३॥

अ꣡स꣢꣯र्जि । व꣡क्वा꣢꣯ । र꣡थ्ये꣢꣯ । य꣡था꣢꣯ । आ꣣जौ꣢ । धि꣣या꣢ । म꣣नो꣡ता꣢ । प्र꣣थमा꣢ । म꣣नीषा꣢ । द꣡श꣢꣯ । स्व꣡सा꣢꣯रः । अ꣡धि꣢꣯ । सा꣡नौ꣢꣯ । अ꣡व्ये꣢꣯ । मृ꣣ज꣡न्ति꣢ । व꣡ह्नि꣢꣯म् । स꣡द꣢꣯नेषु । अ꣡च्छ꣢꣯ ॥५४३॥

Mantra without Swara
असर्जि वक्वा रथ्ये यथाजौ धिया मनोता प्रथमा मनीषा । दश स्वसारो अधि सानो अव्ये मृजन्ति वह्निꣳ सदनेष्वच्छ ॥

असर्जि । वक्वा । रथ्ये । यथा । आजौ । धिया । मनोता । प्रथमा । मनीषा । दश । स्वसारः । अधि । सानौ । अव्ये । मृजन्ति । वह्निम् । सदनेषु । अच्छ ॥५४३॥

Samveda - Mantra Number : 543
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(यथा) जिस प्रकार (आाजौ) संग्राम में (रथ्ये) जहाँ रथादि हों वहां (वक्वा) बोली बोलने वाले नायक से (प्रथमा) श्रेष्ठ (मनोता) जिसमें मन ओत-प्रोत हों उस (मनीषा) मन की चलाने वाली (धिया) बुद्धि अर्थात् पूर्ण सावधानी से (असर्जि) अस्त्र शस्त्र वा अश्वादि चलवाये जाते हैं, इसी प्रकार (दश स्वसारः) १० अंगुलियें (अव्ये) पर्वत के (अधिसानो) सानुप्रदेश में (सदनेषु) सोमोत्पत्ति के स्थानों में (अच्छ) भले प्रकार से (वह्निम) ले चलने की शक्ति वाले सोम को (मृजन्ति) शुद्ध करें और छोड़ें॥
Footnote
अष्टाध्यायी ७।१।३९ निघ० २।५ इत्यादि के प्रमाण और ऋ० ९। ९१। १ में जो पाठों के भेद हैं वे संस्कृतभाष्य में देखिये और सायणाचार्य ने पाठों में बहुत भेद होने पर भी उन्हीं ॠग्वेदस्थ पाठों का अनुसरण करके व्याख्या की है। इसी लिये असम्बद्धता स्पष्ट जान पड़ती है॥