Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 541

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡या꣢ प꣣वा꣡ प꣢वस्वै꣣ना꣡ वसू꣢꣯नि माꣳश्च꣣त्व꣡ इ꣢न्दो꣣ स꣡र꣢सि꣣ प्र꣡ ध꣢न्व । ब्र꣣ध्न꣢श्चि꣣द्य꣢स्य꣣ वा꣢तो꣣ न꣢ जू꣣तिं꣡ पु꣢रु꣣मे꣡धा꣢श्चि꣣त्त꣡क꣢वे꣣ न꣡रं꣢ धात् ॥५४१॥

अ꣣या꣢ । प꣣वा꣢ । प꣣वस्व । एना꣢ । व꣡सू꣢꣯नि । माँ꣣श्चत्वे꣢ । इ꣣न्दो । स꣡र꣢꣯सि । प्र । ध꣣न्व । ब्रध्नः꣢ । चि꣣त् । य꣡स्य꣢꣯ । वा꣡तः꣢꣯ । न । जू꣣ति꣢म् । पु꣣रुमे꣡धाः꣢ । पु꣣रु । मे꣡धाः꣢꣯ । चि꣣त् । त꣡क꣢꣯वे । न꣡र꣢꣯म् । धा꣣त् ॥५४१॥

Mantra without Swara
अया पवा पवस्वैना वसूनि माꣳश्चत्व इन्दो सरसि प्र धन्व । ब्रध्नश्चिद्यस्य वातो न जूतिं पुरुमेधाश्चित्तकवे नरं धात् ॥

अया । पवा । पवस्व । एना । वसूनि । माँश्चत्वे । इन्दो । सरसि । प्र । धन्व । ब्रध्नः । चित् । यस्य । वातः । न । जूतिम् । पुरुमेधाः । पुरु । मेधाः । चित् । तकवे । नरम् । धात् ॥५४१॥

Samveda - Mantra Number : 541
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(इन्दो) सोम ! (अया) इस (पवा) पवित्र धारा से (मांश्चत्वः) अश्ववत् वेगगामी (सरसि) उदकपूर्ण आकाश में (प्र धन्व) ऊंचा जा, तथा (एना) इन (वसूनि) धान्यादि धनों कों (पवस्व) वर्षाव। (यस्य) जिस तेरे (वातः न) वायु के समान (न रम्) ले चलने वाले (जूतिम्) वेग को (तकवे) गमन के लिये (पुरुमेधाः) बहुत प्रज्ञा वाला पुरुष (चित्) भी (ब्रघ्नः चित्) और सूर्य (धात्) धारण करे॥
यज्ञ में भले प्रकार अभिषव किया हुआ सोम अग्नि में हवन किया जाता है जिससे सूर्यादि भौतिक देवों का आप्यायन होता है और उसके पान से विद्वान् यज्ञकर्त्ताओं का आप्यायन होता है। सोम सरलस्वभाव वाला, बुद्धि का उत्पादक और गतिवालों की गति का सहायक है। यह तात्पर्य है।
Footnote
अष्टाध्यायी ३। २। १०१॥ ६। १। १६९॥ ३। ३। ९७॥ निघण्टु १। १४॥ १। १२॥ २। १४ इत्यादि के प्रमाण और ऋ० ९। ९७। ५२ का पाठभेद संस्कृतभाष्य में देखिये॥