Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 539

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कण्वो घौरः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢धि꣣ य꣡द꣢स्मिन्वा꣣जि꣡नी꣢व꣣ शु꣢भः꣣ स्प꣡र्ध꣢न्ते꣣ धि꣢यः꣣ सू꣢रे꣣ न꣡ विशः꣢꣯ । अ꣣पो꣡ वृ꣢णा꣣नः꣡ प꣢वते꣣ क꣡वी꣢यान्व्र꣣जं꣡ न प꣢꣯शु꣣व꣡र्ध꣢नाय꣣ म꣡न्म꣢ ॥५३९॥

अ꣡धि꣢꣯ । यत् । अ꣣स्मिन् । वाजि꣡नि꣢ । इ꣣व । शु꣡भः꣢꣯ । स्प꣡र्ध꣢꣯न्ते । धि꣡यः꣢꣯ । सू꣡रे꣢꣯ । न । वि꣡शः꣢꣯ । अ꣣पः꣢ । वृ꣣णानः꣢ । प꣣वते । क꣡वी꣢꣯यान् । व्र꣣ज꣢म् । न । प꣣शुव꣡र्ध꣢नाय । प꣣शु । व꣡र्ध꣢꣯नाय । म꣡न्म꣢꣯ ॥५३९॥

Mantra without Swara
अधि यदस्मिन्वाजिनीव शुभः स्पर्धन्ते धियः सूरे न विशः । अपो वृणानः पवते कवीयान्व्रजं न पशुवर्धनाय मन्म ॥

अधि । यत् । अस्मिन् । वाजिनि । इव । शुभः । स्पर्धन्ते । धियः । सूरे । न । विशः । अपः । वृणानः । पवते । कवीयान् । व्रजम् । न । पशुवर्धनाय । पशु । वर्धनाय । मन्म ॥५३९॥

Samveda - Mantra Number : 539
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(यत्) जब कि (वाजिनीव) जैसे बलवान् घोड़े पर तथा (सूरे न) जैसे सूर्य पर (शुभः) सुहाती हुई (विशः) किरणें (अस्मिन्) इस सोम पर (अधि स्पर्धन्ते) एक दूसरी से द्रढ़ कर प्रकाश करती हैं, तब (न) जैसे (कवीयान्) अति चतुर गोपालक (मन्म व्रजम्) रक्षा वा सम्मानयोग्य खरक में (पशुवर्धनाय) पशुओं की वृद्धि के लिए (पवते) जाता है। वैसे ही यह सोम भी (अपः) मेघस्थ जलों को (वृणानः) आच्छादित करता हुआ वृष्टि मे पशु आदि की वृद्धि के लिए आकाश को जाता है॥
Footnote
निघण्टु १। १४॥ २। १४॥ के ३। १५ के प्रमाण और ऋग्वेद ९। ९४। १ पाठभेदादि संस्कृतभाष्य में देखिये। किन्हीं—किन्हीं पुस्तकों में मूल में (शुभः)पद विसर्गरहित देखा जाता है॥