Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

Samveda Mantra 526

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣स्य꣢ प्रे꣣षा꣢ हे꣣म꣡ना꣢ पू꣣य꣡मा꣢नो दे꣣वो꣢ दे꣣वे꣢भिः꣣ स꣡म꣢पृक्त꣢ र꣡स꣢म् । सु꣣तः꣢ प꣣वि꣢त्रं꣣ प꣡र्ये꣢ति꣣ रे꣡भ꣢न्मि꣣ते꣢व꣣ स꣡द्म꣢ पशु꣣म꣢न्ति꣣ हो꣡ता꣢ ॥५२६॥

अ꣣स्य꣢ । प्रे꣣षा꣢ । हे꣣म꣡ना꣢ । पू꣣य꣡मा꣢नः । दे꣣वः꣢ । दे꣣वे꣡भिः꣣ । सम् । अ꣣पृक्त । र꣡स꣢꣯म् । सु꣣तः꣢ । प꣣वि꣢त्र꣢म् । प꣡रि꣢꣯ । ए꣣ति । रे꣡भ꣢꣯न् । मि꣣ता꣢ । इ꣣व । स꣡द्म꣢꣯ । प꣣शुम꣡न्ति꣢ । हो꣡ता꣢꣯ ॥५२६॥

Mantra without Swara
अस्य प्रेषा हेमना पूयमानो देवो देवेभिः समपृक्त रसम् । सुतः पवित्रं पर्येति रेभन्मितेव सद्म पशुमन्ति होता ॥

अस्य । प्रेषा । हेमना । पूयमानः । देवः । देवेभिः । सम् । अपृक्त । रसम् । सुतः । पवित्रम् । परि । एति । रेभन् । मिता । इव । सद्म । पशुमन्ति । होता ॥५२६॥

Samveda - Mantra Number : 526
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Tulsiram Swami) - हिन्दी
Meaning
(अस्य) इस वेद की (हेमना) सुवर्णतुल्य बहुमूल्य (प्रेषा) आज्ञा से [आज्ञानुसार] (पूयमानः) शोधा हुआ और (सुतः) अभिषुत सम्पन्न हुआ सोम (रेभन्) अग्नि में हवन करने से चिटचिटाता हुआ (पर्येति) गगनमण्डन में सब ओर फैलता है, तब (देवः) सूर्य (देवेभिः) वायु आदि देवों सहित (पवित्रं रसम्) शुद्ध रस को (समपृक्त) छुपाता वर्षाता है। चिटचिटा शब्द करते हुए सोम के आकाशमण्डल में जाने पर दृष्टान्त— (मितेव) जिस प्रकार गिनने वाला और (होता) बुलाने वा दुहने वाला पुकारता हुआ (पशुमन्ति) पशु वाले (सद्म) घरों में जाता है तद्वत्॥
जिस प्रकार गवादि पशुओं का संभालने, दुहने वाला, पुकारता हुआ खरक को जाता और दुहता है, इसी प्रकार हवन किया हुआ सोम आकाश रूपी खरक में मेधरूपी पशुओं को पुकारता हुआ मानो जाकर दुहता है।
Footnote
अष्टाध्यायी ६। १। १६८॥ ६। १। ३४ इत्यादि प्रमाण संस्कृतभाष्य में देखिये॥ ऋ० ९। ९७। १ में भी॥